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*दमोह में नरवाई पर सख्त अभियान: खेत बचाने की जंग, 7 गाँवों में विशेष निगरानी*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज दमोह—

*दमोह में नरवाई पर सख्त अभियान: खेत बचाने की जंग, 7 गाँवों में विशेष निगरानी*


दमोह जिले के पथरिया विकासखंड में इस वर्ष नरवाई (फसल अवशेष) जलाने की समस्या को खत्म करने के लिए प्रशासन ने व्यापक और सुनियोजित अभियान शुरू किया है। कलेक्टर श्री कोचर के निर्देशन में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा “मध्य प्रदेश कृषक कल्याण वर्ष 2026” के तहत चलाया जा रहा यह अभियान पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।

**हॉटस्पॉट गाँवों पर विशेष फोकस**

पिछले वर्षों में नरवाई जलाने की सर्वाधिक घटनाओं को देखते हुए विकासखंड पथरिया के 7 ग्राम—
बोतराई, बासा कलां, असलाना, चिरोला, सागौनी कलां, खिरिया शंकर एवं पथरिया (नगर पंचायत)—को ‘हॉटस्पॉट’ के रूप में चिन्हित किया गया है।
इन क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा विशेष निगरानी रखी जा रही है और अधिकारियों की टीम लगातार भ्रमण कर रही है, ताकि किसी भी स्थिति में खेतों में आग न लग सके।

**जन-जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार**

ग्राम पंचायत खिरिया शंकर और सागौनी कलां में आयोजित कार्यक्रमों में किसानों को सीधे जोड़ने के लिए कृषक चौपाल का आयोजन किया गया।
इस दौरान अधिकारियों ने किसानों से संवाद कर उन्हें नरवाई प्रबंधन के वैज्ञानिक उपाय बताए।

कृषक चौपाल के माध्यम से सीधा संवाद

बाइक रैली निकालकर गाँव-गाँव संदेश प्रसारित

पैदल जागरूकता यात्रा से घर-घर संपर्क

“नरवाई न जलाएं, खेत की सेहत बचाएं” का संदेश

कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी उमाशंकर प्रजापति, कृषि विस्तार अधिकारी संजय पटेल, सुरेश बिरला एवं राघवेंद्र पटेल ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि नरवाई जलाना केवल एक आदत नहीं, बल्कि भविष्य की खेती के लिए बड़ा खतरा है।

*नरवाई जलाने के दुष्परिणाम खेत से पर्यावरण तक खतरा*

अधिकारियों ने चौपाल में विस्तार से बताया कि नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान केवल खेत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका असर पूरे पर्यावरण पर पड़ता है—

**मिट्टी की सेहत पर असर**

मिट्टी में मौजूद मित्र कीट और सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं

जमीन की उर्वरता कम होकर बंजर होने लगती है

लंबे समय में उत्पादन घटता है

**जैव विविधता को नुकसान**

खेतों के आसपास लगे औषधीय पौधे और पेड़ जल जाते हैं

छोटे जीव-जंतु और पक्षियों के अंडे नष्ट हो जाते हैं

पशुओं के लिए उपलब्ध चारा समाप्त हो जाता है

**पर्यावरण पर दुष्प्रभाव**

आग से स्थानीय तापमान में वृद्धि होती है

धुआँ व प्रदूषण बढ़कर स्वास्थ्य पर असर डालता है

आग फैलने पर पूरे क्षेत्र में खतरा बढ़ जाता है

**दुर्घटना का खतरा**

एक खेत की आग कई बार अनियंत्रित होकर बड़े क्षेत्र में फैल जाती है

इससे फसल, मकान और जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है

वैज्ञानिक विकल्प भी बताए गए

अभियान के दौरान किसानों को नरवाई प्रबंधन के कई वैकल्पिक उपाय भी बताए गए—

अवशेषों को खेत में ही मल्चिंग के रूप में उपयोग करना

मशीनों की मदद से रोटावेटर/हैप्पी सीडर का उपयोग

जैविक खाद के रूप में नरवाई का पुनः उपयोग

पशुओं के चारे या अन्य उपयोग में लाना

प्रशासन का लक्ष्य और आगे की रणनीति

प्रशासन ने इस बार स्पष्ट लक्ष्य तय किया है—
“नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य पर लाना”

इसके लिए—

लगातार मैदानी निरीक्षण

ग्रामीणों के साथ प्रत्यक्ष संवाद

जरूरत पड़ने पर दंडात्मक कार्रवाई

और जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा

पथरिया विकासखंड में चल रहा यह अभियान केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है। यदि किसान नरवाई न जलाकर वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं, तो इससे न केवल उनकी जमीन की उर्वरता बढ़ेगी बल्कि उत्पादन और आय में भी सकारात्मक वृद्धि होगी।

“नरवाई न जलाएं, खेत की सेहत बचाएं” — यही संदेश अब हर गाँव तक पहुंचाया जा रहा है।

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