—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज दमोह—
*40 साल देश सेवा के बाद घर लौटे बीएसएफ जवान दमोह स्टेशन बना जश्न का मंच*
दमोह। देश की सीमाओं पर चार दशक तक मुस्तैदी से डटे रहने वाले बीएसएफ जवान गणेश प्रसाद जब रिटायरमेंट के बाद अपने गृह नगर दमोह लौटे, तो रेलवे स्टेशन का नजारा भावनाओं, गर्व और सम्मान से सराबोर हो उठा। जैसे ही वे स्टेशन परिसर में पहुंचे, पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया।
परिवारजनों, मित्रों और शहरवासियों ने फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और डीजे की गूंज के बीच उनका भव्य स्वागत किया। हर कोई अपने इस सपूत को सम्मान देने के लिए आतुर नजर आया। किसी ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया, तो किसी ने उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य हर किसी की आंखें नम कर गया।
गणेश प्रसाद, जो पश्चिम बंगाल के कोलकाता में पदस्थ रहे, ने अपने 40 वर्षों के लंबे कार्यकाल में देश की सुरक्षा के लिए समर्पण और साहस की मिसाल पेश की। उनके स्वागत में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि समाज अपने रक्षकों के योगदान को कभी नहीं भूलता।
इस अवसर पर भावुक होते हुए गणेश प्रसाद ने कहा,
“आज मुझे जो सम्मान और स्नेह मिला है, वह मेरे जीवन के सबसे अमूल्य पलों में से एक है। मैंने हमेशा देश सेवा को अपना कर्तव्य समझा, लेकिन आज लगा कि मेरा अपना शहर और समाज मेरे साथ मजबूती से खड़ा है।”
स्टेशन परिसर में युवाओं ने डीजे की धुनों पर देशभक्ति गीतों के साथ नृत्य कर माहौल को और भी उत्साहपूर्ण बना दिया। ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
यह सिर्फ एक सैनिक का स्वागत नहीं था, बल्कि उस समर्पण, त्याग और देशभक्ति का सम्मान था, जो वर्षों तक सीमाओं पर तैनात रहकर देश की रक्षा करता है।
गणेश प्रसाद का यह अभिनंदन न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे दमोह जिले के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक बन गया।














































