—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*फर्जी सिम कार्ड रैकेट का भंडाफोड़ कूटरचित दस्तावेजों से सिम एक्टिव कर बेचने वाले दो आरोपी गिरफ्तार*
दमोह। जिले में फर्जी सिम कार्ड के माध्यम से अवैध गतिविधियों को अंजाम देने वाले गिरोह पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई राज्य स्तर पर चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन FACE (Facial Authentication and Compliance Enforcement)” के तहत की गई, जिसका उद्देश्य फर्जी सिम प्रदाताओं पर अंकुश लगाना है।
पुलिस अधीक्षक दमोह श्रुतकीर्ति सोमवंशी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सुजीत सिंह भदौरिया एवं एसडीओपी हटा श्री सौरभ त्रिपाठी के निर्देशन में साइबर सेल दमोह एवं थाना हटा की संयुक्त टीम ने इस पूरे मामले का खुलासा किया। पुलिस मुख्यालय स्थित राज्य साइबर सेल भोपाल द्वारा उपलब्ध कराई गई पांच संदिग्ध डायरेक्टरी के विश्लेषण में वर्ष 2019 से 2021 के बीच 1204 फर्जी सिम कार्ड सक्रिय पाए गए। इन सिम कार्डों के संबंध में विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों से CAF (Customer Application Form) रिपोर्ट प्राप्त कर गहन जांच की गई।
जांच के दौरान हटा कस्बे के निवासी प्रवीनराज दुबे एवं अखिलेश चौरसिया को संबंधित दस्तावेज दिखाए गए, जिनमें उन्होंने खुलासा किया कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर अज्ञात व्यक्तियों ने अपनी फोटो लगाकर फर्जी सिम कार्ड जारी कराए। भरत उर्फ मोंटी तंतवाय, निवासी कमला नेहरू वार्ड, हटा रजनीश अहिरवार, निवासी ग्राम कुलुआ, थाना हटा द्वारा लोगों के असली आधार कार्ड हासिल कर, उन पर अपनी फोटो लगाकर अलग-अलग नामों से सिम कार्ड एक्टिवेट किए जाते थे।
कस्टमर सिग्नेचर वेरिफिकेशन के लिए भी अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे पहचान छुपाई जा सके। आरोपी इन फर्जी सिम कार्डों को बेचकर आर्थिक लाभ अर्जित कर रहे थे, जिससे संभावित आपराधिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की आशंका जताई जा रही है।
प्राप्त साक्ष्यों, दस्तावेजों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर थाना हटा में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419 (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी), 468 (कूटरचना), 471 (जालसाजी दस्तावेज का उपयोग), 34 (साझा आपराधिक आशय) एवं आईटी एक्ट की धारा 66(C) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
दोनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। साइबर सेल द्वारा दी गई अन्य डायरेक्टरी के आधार पर अभी कई और सिम कार्डों की जांच लंबित है।
टेलीकॉम कंपनियों से CAF रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इस मामले में और भी आरोपियों के नाम सामने आ सकते हैं तथा आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले के खुलासे में निरीक्षक सुधीर कुमार बेगी, उपनिरीक्षक नरेन्द्र तिवारी, प्रधान आरक्षक अनिल गौतम, महेन्द्र कुमार, आरक्षक पवन पटैल सहित साइबर सेल के सौरभ टंडन, राकेश आठ्या, रोहित राजपूत, मयंक दुबे एवं अभिषेक कोष्टी की महत्वपूर्ण भूमिका रही l
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आधार कार्ड या अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न दें तथा यदि किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।












































