—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*दमोह में बड़ा प्रशासनिक एक्शन RES के तत्कालीन EE मनोज गुप्ता निलंबित*
*ग्रेवल कार्यों में अनियमितताओं का मामला उजागर*

दमोह जिले में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) विभाग में लंबे समय से चल रही अनियमितताओं पर आखिरकार प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। विभाग के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री (EE) मनोज गुप्ता को गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई विशेष रूप से ‘ग्रेवल’ सड़कों के निर्माण एवं सुधार कार्यों में सामने आई अनियमितताओं के चलते की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रेवल सड़कों के निर्माण और सुधार कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे किए गए। शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद कार्यों की स्वीकृति में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
बताया जा रहा है कि राज्य आयोजना मद 6084 के तहत कार्यों की स्वीकृति के लिए उच्च स्तर की अनुमति और SFC की मुहर अनिवार्य होती है, लेकिन इन नियमों को दरकिनार कर फाइलों में हेरफेर कर स्वीकृतियां हासिल कर ली गईं।
जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा फर्जी अभिलेख तैयार कर प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त की गई। जिन 23 ग्रेवल मार्गों के निर्माण की स्वीकृति दी जानी थी, वहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चार गुना अधिक राशि के कार्यों को मंजूरी दिलाई गई l
इस पूरे खेल में विभागीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, तत्कालीन EE मनोज गुप्ता ने वरिष्ठ अधिकारियों को वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराया। फाइलों में गड़बड़ी कर और नियमों को नजरअंदाज करते हुए स्वीकृतियां हासिल की गईं। यहां तक कि तत्कालीन सीईओ स्तर पर भी बिना पूरी जांच के फाइलों पर हस्ताक्षर किए जाने की बात सामने आई है।
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अब शासन स्तर पर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। दस्तावेजों की पड़ताल में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता जा रहा है कि सरकारी धन के दुरुपयोग की सुनियोजित साजिश रची गई थी।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे घोटाले में और कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी शामिल रहे हैं।
फिलहाल मनोज गुप्ता के निलंबन को प्रशासन की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। इससे यह संकेत भी मिला है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और भी बड़े नामों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। अब सबकी नजर जांच के अंतिम परिणाम और आगे होने वाली कार्रवाइयों पर टिकी हुई है।










































