—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*सीतानगर जलाशय में जहर डालकर मछलियों की हत्या लाखों का नुकसान—मछुआरों ने सौंपा ज्ञापन*

दमोह। जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत सीतानगर जलाशय में असामाजिक तत्वों द्वारा जहरीला पदार्थ डालकर मछलियों को मारने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना से गरीब मछुआरों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। मामले को लेकर ग्रामीण रायकवार माझी समाज ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि सीतानगर जलाशय में मत्स्य पालन नीति 2008 के तहत संगम मत्स्य उद्योग सहकारी समिति सीतानगर का विधिवत पंजीयन किया गया है। यह पंजीयन कलेक्टर की अनुशंसा पर सिंचाई विभाग, सहायक पंजीयक कार्यालय एवं मत्स्य विभाग द्वारा किया गया था। समिति में रैकवार समाज के साथ-साथ एससी-एसटी वर्ग के सदस्य भी शामिल हैं।
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार 27 अप्रैल 2026 की रात अज्ञात असामाजिक तत्वों ने जलाशय में जहरीला पदार्थ घोल दिया, जिससे बड़ी मात्रा में मछलियां मर गईं। इस घटना से समिति से जुड़े मछुआरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि “मडकोलेश्वर मछुआ सहकारी समिति” के नाम से क्षेत्र में कोई वैध पंजीकरण नहीं है। इसके बावजूद कुछ लोग अवैध रूप से मछली पकड़ने और जलाशय में जहर डालने जैसी गतिविधियों में संलिप्त हैं। इतना ही नहीं, ये लोग करंट और डायनामाइट का उपयोग कर मछलियां पकड़ रहे हैं, जो पूरी तरह गैरकानूनी है।
समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि जब वे इन गतिविधियों का विरोध करते हैं, तो उन्हें गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं, जिससे क्षेत्र में लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई है।
समिति अध्यक्ष लखन लाल रैकवार के अनुसार, भोपाल रजिस्ट्रार द्वारा भी स्पष्ट किया गया है कि सीतानगर जलाशय में मत्स्य पालन का अधिकार केवल संगम मत्स्य उद्योग सहकारी समिति को ही है। इसके बावजूद बाहरी तत्व अवैध हस्तक्षेप कर रहे हैं।
मछुआरा समाज ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अवैध रूप से मछली पकड़ने वालों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला अध्यक्ष मोंटी रैकवार, डालचंद रायकवार, लक्खू रायकवार, अशोक पटेल, अंकित माझी, लच्छू रैकवार सहित समाज के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।












































