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*150 किमी दूर परीक्षा केंद्र से परेशान छात्र, पढ़ाई छोड़ने की कगार पर आदिवासी बच्चे*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज दमोह—

*150 किमी दूर परीक्षा केंद्र से परेशान छात्र, पढ़ाई छोड़ने की कगार पर आदिवासी बच्चे*

दमोह/हटा। शिक्षा व्यवस्था की खामियों का खामियाजा एक बार फिर ग्रामीण और आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। हटा अनुविभाग में कक्षा 10वीं और 12वीं के पूरक (सप्लीमेंट्री) परीक्षा देने वाले 100 से अधिक छात्र-छात्राओं को 100 से 150 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिए गए हैं, जिससे उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

वनांचल क्षेत्रों से आने वाले अधिकांश छात्र अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। हायर सेकेंडरी स्कूल रजपुरा के लगभग 27 छात्रों को पूरक परीक्षा आई है, जिनमें से अधिकतर सूरजपुरा, अमखेरा, सुनेरा, बनौली और पनारी जैसे दूरस्थ गांवों के निवासी हैं। इन छात्रों को परीक्षा केंद्र जबेरा में आवंटित किया गया है, जो उनके गांव से करीब 150 किलोमीटर दूर है।

छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि उनके पास इतनी दूर आने-जाने के लिए न तो कोई साधन है और न ही वे आर्थिक रूप से इतना खर्च उठा सकते हैं। 7 मई से 22 मई तक सुबह 9 बजे से होने वाली परीक्षा में शामिल होना उनके लिए लगभग असंभव है। ऐसे में कई छात्र परीक्षा से वंचित रह सकते हैं और उन्हें मजबूरन अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ सकती है।

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी बी.एल. बिदौल्या ने बताया कि हटा नगर में सात परीक्षा केंद्र उपलब्ध हैं और यहां परीक्षा कराना संभव है, लेकिन जो सूची आई है वह उच्च स्तर से जारी की गई है। इस संबंध में निर्णय लेने के लिए उच्च अधिकारियों से ही संपर्क करना होगा।

छात्र-छात्राओं ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि उनका परीक्षा केंद्र हटा या नजदीकी क्षेत्र में किया जाए, ताकि वे अपनी परीक्षा दे सकें। छात्रों दीपा गौड़, जगदीश यादव, जीतमल आदिवासी, दिलीप भील, दिनेश गौड़, कविता अहिरवार, उमा सौर और रीना भील ने कहा कि यदि केंद्र नजदीक नहीं हुआ तो उन्हें आगे की पढ़ाई छोड़कर घरेलू कार्यों में ही लगना पड़ेगा।

अब सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग इन छात्रों की मजबूरी समझते हुए कोई समाधान निकालेगा, या फिर व्यवस्था की यह दूरी उनके भविष्य पर भारी पड़ेगी।

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