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*कलेक्ट्रेट में गोपनीयता भंग का बड़ा मामला कलेक्टर चेंबर की बातें बाहर पहुंचीं, कर्मचारी सचिन खरे निलंबित*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*कलेक्ट्रेट में गोपनीयता भंग का बड़ा मामला कलेक्टर चेंबर की बातें बाहर पहुंचीं, कर्मचारी सचिन खरे निलंबित*

दमोह। जिला कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक गोपनीयता भंग होने का एक बड़ा मामला सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर प्रताप नारायण सिंह यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करते हुए कर्मचारी सचिन खरे को निलंबित कर दिया है। वहीं कुछ अन्य कर्मचारियों को उनके मूल विभाग वापस भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। मामले में कलेक्टर कार्यालय और पीए कक्ष में लगे पुराने टेलीफोन सेट सील कर तकनीकी जांच के लिए भेजे गए हैं।

सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से कलेक्टर कार्यालय में प्रशासनिक निरीक्षण, विभागीय कार्रवाई और गोपनीय बैठकों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं। इसी दौरान कलेक्टर को बाहर से एक ऐसा फोन कॉल प्राप्त हुआ, जिसमें कार्यालय के भीतर हुई चर्चा और निर्णयों से जुड़ी बातें सामने आने लगीं। इससे कलेक्टर को संदेह हुआ कि कलेक्ट्रेट के भीतर की गोपनीय जानकारी किसी माध्यम से बाहर पहुंचाई जा रही है।

बताया जा रहा है कि सूचना मिलने के बाद कलेक्टर प्रताप नारायण सिंह यादव स्वयं सक्रिय हुए और उन्होंने अपने मोबाइल की रिकॉर्डिंग व्यवस्था चालू कर कलेक्ट्रेट परिसर के विभिन्न कमरों का निरीक्षण शुरू किया। निरीक्षण के दौरान पीए कक्ष में लगे एक पुराने टेलीफोन सेट से आवाज सुनाई दी। जब फोन की जांच की गई तो वह सक्रिय अवस्था में पाया गया। इसके बाद मामला गंभीर मानते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी गई।

प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ पुराने कर्मचारी कलेक्टर चेंबर की बातचीत सुनकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक जानकारियां बाहर पहुंचा रहे थे। जांच के दौरान जिस सीट पर कर्मचारी सचिन खरे पदस्थ थे, वहां लगे टेलीफोन और गतिविधियों को संदिग्ध पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

सूत्रों की मानें तो मामले के सामने आने के बाद कलेक्ट्रेट में पदस्थ कुछ अन्य कर्मचारियों को भी उनके मूल विभाग वापस भेजा गया है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

कलेक्टर प्रताप नारायण सिंह यादव ने पूरे मामले को प्रशासनिक गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए दोनों टेलीफोन सेट सील कर तकनीकी परीक्षण के लिए भेज दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

घटना के बाद जिला कलेक्ट्रेट परिसर में कर्मचारियों के बीच दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को गोपनीय सूचनाओं के लीक होने पर की गई बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

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