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*सतना जेल की महिला अधिकारी ने पेश की मिसाल, प्रेम के लिए तोड़ीं धर्म और समाज की दीवारें*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज दमोह—

*सतना जेल की महिला अधिकारी ने पेश की मिसाल, प्रेम के लिए तोड़ीं धर्म और समाज की दीवारें*

सतना मध्यप्रदेश से सामने आई एक अनोखी प्रेम कहानी इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां फिरोजा खातून ने समाज और धर्म की परंपरागत सीमाओं से ऊपर उठते हुए हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट चुके धर्मेंद्र सिंह के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर नई मिसाल पेश की है।

यह विवाह 5 मई को लवकुश नगर में वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। शादी की खबर सामने आने के बाद यह प्रेम कहानी लोगों के बीच चर्चा और सराहना दोनों का विषय बन गई है।

जानकारी के अनुसार, फिरोजा खातून सतना सेंट्रल जेल में वारंट इंचार्ज के पद पर कार्यरत थीं। इसी दौरान धर्मेंद्र सिंह जेल में वारंट संबंधी कार्य करता था। कामकाज के दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो समय के साथ गहरी दोस्ती और फिर प्रेम में बदल गई।

बताया जाता है कि धर्मेंद्र सिंह ने हत्या के मामले में करीब 14 वर्ष जेल में बिताए। अच्छे आचरण और अनुशासन के आधार पर उसे रिहाई मिली। जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों का संपर्क बना रहा और अंततः उन्होंने जीवनभर साथ रहने का निर्णय लिया।

इस रिश्ते को लेकर फिरोजा खातून के परिजन सहमत नहीं थे और शादी समारोह से दूरी बनाए रखी। लेकिन इसके बावजूद दोनों ने साहस के साथ अपने प्रेम को विवाह का रूप दिया। विवाह में राजबहादुर मिश्रा ने अपनी पत्नी के साथ कन्यादान की रस्म निभाई। समारोह में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

यह विवाह केवल दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि सच्चा प्रेम जाति, धर्म और अतीत की सीमाओं से बड़ा होता है। एक ओर जहां धर्मेंद्र सिंह ने जेल से निकलकर नई जिंदगी शुरू करने का प्रयास किया, वहीं फिरोजा खातून ने समाज की परवाह किए बिना अपने विश्वास और भावनाओं को महत्व दिया।

आज के दौर में जब छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते टूट जाते हैं, ऐसे में यह कहानी विश्वास, साहस और समर्पण की मिसाल बनकर सामने आई है। दोनों ने यह साबित किया कि इंसान की पहचान उसका वर्तमान और उसका व्यवहार होता है, न कि केवल उसका अतीत।

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