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*रात के अंधेरे में जेसीबी से खुदाई! ग्राम पंचायत कोटा में राजस्व भूमि पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*रात के अंधेरे में जेसीबी से खुदाई! ग्राम पंचायत कोटा में राजस्व भूमि पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल*

दमोह। जिले के पटेरा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटा में राजस्व भूमि पर कथित रूप से रात के समय जेसीबी मशीन और ट्रैक्टरों से खुदाई किए जाने का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत कोटा के सरपंच पूरन पटेल द्वारा रात के अंधेरे में जेसीबी मशीन से खुदाई करवाई जा रही थी और मौके पर चार ट्रैक्टर भी संचालित हो रहे थे। मामले को लेकर कई विभागों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने जब रात में चल रहे इस कार्य को देखा तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया। सबसे पहले ग्राम पंचायत कोटा के सरपंच पूरन पटेल से बात की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच ने कहा कि “आप जो भी हैं अच्छी बात है, मेरी सभी अधिकारियों से बात हो गई है, सब सेटिंग है।” इस कथित बयान के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई।

मामले की जानकारी लेने के लिए वन विभाग से जुड़े रेंजर बीट प्रभारी संजय आहीरवाल को फोन लगाया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं अखलेश चौरसिया को भी कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु जवाब नहीं मिल सका।

इस संबंध में पटेरा थाना प्रभारी धर्मेंद्र मिश्रा से चर्चा की गई तो उन्होंने इसे राजस्व विभाग का मामला बताते हुए कहा कि संबंधित विषय में तहसीलदार से संपर्क किया जाए। इसके बाद तहसीलदार महोदय को फोन लगाया गया, लेकिन उनका फोन लगातार व्यस्त बताया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अगले दिन भी इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

अब पूरे मामले में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यदि राजस्व भूमि पर खुदाई की जा रही थी तो क्या इसके लिए राजस्व विभाग से अनुमति ली गई थी? क्या खनिज विभाग से उत्खनन की स्वीकृति प्राप्त थी? यदि क्षेत्र वन सीमा से जुड़ा है तो क्या वन विभाग की अनुमति मौजूद थी? और यदि कार्य ग्राम पंचायत का बताया जा रहा है तो क्या पंचायत की आधिकारिक स्वीकृति या प्रस्ताव पारित किया गया था?

ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय मशीनों से खुदाई कर प्रशासनिक नियमों की अनदेखी की गई। लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ वैधानिक था तो दिन के समय पारदर्शिता के साथ कार्य कराया जाना चाहिए था। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

वहीं संबंधित अधिकारियों की चुप्पी और फोन रिसीव न किए जाने से क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच करता है या नहीं।

फिल हाल इन्टरवल……….?

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