—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*सरपंच और पत्रकार की दोहरी भूमिका पर उठे सवाल ग्रामीणों ने प्रशासन से की जांच की मांग*
*बडागांव सरपंच है या पत्रकार सबको के घेरे में सरपंच महोदय और पत्रकार*


दमोह। दमोह जिले की ग्राम पंचायत बड़ा गांव के सरपंच गोकुल सिंह लोधी इन दिनों अपनी दोहरी भूमिका को लेकर चर्चा में हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गोकुल सिंह लोधी एक ओर ग्राम पंचायत बड़ा गांव के निर्वाचित सरपंच हैं, वहीं दूसरी ओर वे स्वयं को पत्रकारिता से जुड़ा बताते हैं और जिला ब्यूरो स्तर पर कार्य करने का दावा करते हैं।
इसी को लेकर क्षेत्र में जनप्रतिनिधि और पत्रकार की भूमिका के बीच संभावित हितों के टकराव को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार हाल ही में गोकुल सिंह लोधी से इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि वे वर्तमान में ग्राम पंचायत बड़ा गांव के सरपंच हैं और पत्रकारिता से भी जुड़े हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत से जुड़े मामलों में जब उनसे सवाल पूछे जाते हैं तो वे स्वयं को पत्रकार भी बताते हैं। इससे लोगों के बीच यह बहस शुरू हो गई है कि एक ही व्यक्ति किस प्रकार जनप्रतिनिधि और पत्रकार दोनों भूमिकाओं का निर्वहन कर सकता है।
ग्रामीणों का दावा है कि जांच के दौरान उनके व्हाट्सएप प्रोफाइल पर जिला जनसंपर्क अधिकारी के साथ तस्वीर प्रदर्शित दिखाई दी। साथ ही वे विभिन्न पत्रकार समूहों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पत्रकारों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए पाए गए।
ग्रामीणों का आरोप है कि इससे उन्हें जिले की गतिविधियों और प्रशासनिक सूचनाओं की जानकारी पहले से मिल जाती है। हालांकि किसी अधिकारी या पत्रकार के साथ फोटो होना अथवा किसी समूह में शामिल होना अपने आप में किसी नियम उल्लंघन का प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन ग्रामीण इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच पद एक संवैधानिक और सार्वजनिक जिम्मेदारी वाला पद है, जबकि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य निष्पक्ष और स्वतंत्र सूचना देना है। ऐसे में दोनों भूमिकाओं के एक साथ निर्वहन को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्न उठ रहे हैं।
क्षेत्र के लोगों ने यह भी मुद्दा उठाया है कि जिले की कई ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच निर्वाचित होने के बावजूद उनके स्थान पर परिजन या पति प्रतिनिधित्व करते दिखाई देते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना के अनुरूप निर्वाचित प्रतिनिधि को स्वयं कार्य करना चाहिए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो उस पर भी प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जिला पंचायत तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि सरपंच और पत्रकार की दोहरी भूमिका से जुड़े मामले की विधिसम्मत जांच कराई जाए।
उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार का नियम उल्लंघन या हितों का टकराव पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल इस संबंध में किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।
यह संस्करण समाचार शैली में है और आरोपों को आरोप के रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे समाचार संतुलित और प्रकाशन योग्य बना रहता है।
यह तो अभी ट्रेलर है पिक्चर अभी बाकी है बहुत जल्दी खुलासा होगा बड़ा गांव सरपंच है या पत्रकार तमाम पत्रकार साथियों से बताना चाह रहा हूं अगर आप इनको ग्रुप में जोड़े हैं तो इसको शीघ्र ग्रुप से लेफ्ट करें ….?












































