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*पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को विधिक नोटिस जैन समाज ने मांगा ₹1 करोड़ का हर्जाना*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को विधिक नोटिस जैन समाज ने मांगा ₹1 करोड़ का हर्जाना*

दमोह। दिगंबर जैन संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली ‘पिच्छी’ को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पशु अधिकार कार्यकर्ता Maneka Gandhi को विधिक नोटिस भेजा गया है। दमोह निवासी अधिवक्ता अभिषेक कुमार जैन ने जैन समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों की ओर से नोटिस जारी करते हुए उनके बयान को असत्य, भ्रामक और जैन धर्म की भावनाओं को आहत करने वाला बताया है। नोटिस में ₹1 करोड़ के मानहानि हर्जाने की मांग की गई है।

नोटिस के अनुसार, हाल ही में दिल्ली स्थित दिगंबर जैन लाल मंदिर में मेनका गांधी ने कथित रूप से कहा था कि पिच्छी बनाने के लिए लाखों मोरों की हत्या की जाती है तथा उन्होंने 15 लाख मोरों की हत्या का आरोप भी लगाया। जैन समाज का कहना है कि यह दावा बिना किसी प्रमाण, सरकारी अभिलेख या वैज्ञानिक अध्ययन के सार्वजनिक रूप से किया गया।

विधिक नोटिस में कहा गया है कि जैन मुनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छी प्राकृतिक रूप से झड़ने वाले मोरपंखों से बनाई जाती है। जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा के अनुसार किसी भी जीव की हत्या पूर्णतः वर्जित है। समाज का आरोप है कि इस प्रकार के बयान से देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों जैन अनुयायियों, साधु-संतों तथा धार्मिक परंपराओं की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।

नोटिस भेजने वाले इंजी. ऋषभ कुमार जैन, श्रीमती कविता जैन और दिलेश चौधरी की ओर से मेनका गांधी से मांग की गई है कि—

नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपना बयान बिना शर्त वापस लें।

राष्ट्रीय समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक माफी जारी करें।

भविष्य में इस प्रकार की टिप्पणी न करने का लिखित आश्वासन दें।

नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में इन मांगों का पालन नहीं किया गया तो Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 की प्रासंगिक धाराओं के तहत सक्षम न्यायालय में ₹1 करोड़ की क्षतिपूर्ति के लिए दीवानी एवं आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। नोटिस के अनुसार, यदि हर्जाना प्राप्त होता है तो उसकी राशि का उपयोग जीव-दया, गौ-सेवा, पर्यावरण संरक्षण और अन्य लोककल्याणकारी कार्यों में किया जाएगा।

फिलहाल इस मामले में मेनका गांधी की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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