—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*छात्रावासों में वर्षों से वार्डन के पद खाली, AJJAKS ने कलेक्टर और जिला पंचायत CEO को सौंपा ज्ञापन*
*राजपुरा में 14 माह से वार्डन नहीं, मड़ियादो की वार्डन को अतिरिक्त प्रभार पथरिया व राजाबंदी पटेरा में भी रिक्त पद*


दमोह। जिले में संचालित बालिका छात्रावासों की व्यवस्थाओं और लंबे समय से रिक्त वार्डन पदों को लेकर मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJJAKS) जिला दमोह ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया है।
संघ के जिलाध्यक्ष मुरारी लाल अहिरवार ने 10 अगस्त 2026 को कलेक्टर दमोह एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दमोह के नाम अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर संबंधित छात्रावासों में वार्डन की नियुक्ति किए जाने की मांग की है।
संघ के ज्ञापन में कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास राजपुरा, कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास मड़ियादो, सुभाषचंद्र बोस बालिका छात्रावास राजाबंदी पटेरा, कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास पथरिया और कस्तूरबा गांधी छात्रावास खड़ेरी की व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है।
राजपुरा छात्रावास में 14 माह से वार्डन का पद रिक्त
जिला पंचायत CEO को दिए गए ज्ञापन में AJJAKS ने उल्लेख किया है कि जिला शिक्षा केंद्र (समग्र शिक्षा अभियान) दमोह द्वारा संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास राजपुरा में करीब एक वर्ष दो माह से वार्डन का पद रिक्त है। इस पद का अतिरिक्त प्रभार कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास मड़ियादो की वार्डन को दिए जाने की बात ज्ञापन में कही गई है।
संघ के अनुसार मड़ियादो से राजपुरा की दूरी करीब 35 किलोमीटर है। ऐसे में एक ही वार्डन पर दो छात्रावासों की जिम्मेदारी होने से व्यवस्थाओं के संचालन और नियमित निगरानी को लेकर अतिरिक्त दबाव की स्थिति बन सकती है। संघ ने राजपुरा छात्रावास में अलग से वार्डन की नियुक्ति की मांग की है।
राजाबंदी पटेरा और पथरिया में भी रिक्त पद का दावा
ज्ञापन में सुभाषचंद्र बोस बालिका छात्रावास राजाबंदी पटेरा तथा कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास पथरिया में भी करीब दो माह से वार्डन के पद रिक्त होने का उल्लेख किया गया है।
AJJAKS का कहना है कि छात्रावासों में वार्डन की भूमिका छात्राओं की दैनिक व्यवस्थाओं, अनुशासन, सुरक्षा, भोजन, उपस्थिति और अन्य प्रशासनिक कार्यों के संचालन में महत्वपूर्ण होती है। इसलिए रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
खड़ेरी और पथरिया में लंबे समय से एक ही वार्डन के कार्यरत होने का उल्लेख
संघ ने कस्तूरबा गांधी छात्रावास खड़ेरी और कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास पथरिया की पदस्थापना व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है।
ज्ञापन के अनुसार खड़ेरी छात्रावास में एक ही वार्डन करीब 7 वर्षों से, जबकि पथरिया छात्रावास में एक ही वार्डन करीब 8 वर्षों से कार्यरत होने का उल्लेख किया गया है। संघ ने अपने पत्र में वार्डन के प्रभार अथवा नियुक्ति की अवधि को लेकर शासन के तीन वर्ष के प्रावधान का हवाला देते हुए इस स्थिति की भी समीक्षा करने की मांग की है।
हालांकि, इन बिंदुओं की विभागीय स्तर पर स्थिति और लागू नियमों की पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा किया जाना अपेक्षित है।
कलेक्टर से तत्काल नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग
AJJAKS ने कलेक्टर दमोह को सौंपे ज्ञापन में जिला शिक्षा केंद्र (समग्र शिक्षा अभियान) तथा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के माध्यम से संचालित छात्रावासों में रिक्त वार्डन पदों को भरने के लिए तत्काल विज्ञापन जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
संघ का कहना है कि लंबे समय तक रिक्त पदों पर अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है। नियमित वार्डन की नियुक्ति होने से छात्रावासों की प्रशासनिक एवं दैनिक व्यवस्थाओं का संचालन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।
कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
AJJAKS जिलाध्यक्ष मुरारी लाल अहिरवार ने ज्ञापन में चेतावनी दी है कि यदि जिला शिक्षा केंद्र (समग्र शिक्षा अभियान) दमोह एवं जिला शिक्षा अधिकारी दमोह द्वारा संचालित छात्रावासों में वार्डन के रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं की जाती है, तो संघ धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन में आंदोलन की स्थिति में उत्पन्न परिस्थितियों की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर होने की बात भी कही गई है।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर निगाह
AJJAKS द्वारा 10 अगस्त 2026 को दो अलग-अलग अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब संबंधित विभाग की कार्रवाई पर निगाह है। संघ ने विशेष रूप से राजपुरा में लंबे समय से रिक्त वार्डन पद, मड़ियादो की वार्डन को दिए गए अतिरिक्त प्रभार तथा राजाबंदी पटेरा एवं पथरिया में रिक्त पदों का मुद्दा उठाया है।
इसके साथ ही खड़ेरी और पथरिया में लंबे समय से एक ही वार्डन के कार्यरत होने के दावे की भी प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की मांग की गई है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित शिक्षा विभाग इन मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं तथा रिक्त पदों की पूर्ति के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।

















