Home » अपराध » Mp » *गिरदावरी में बड़ा फर्जीवाड़ा? खेत में मक्का, रिकॉर्ड में धान खाली जमीन पर भी दर्ज फसल*

*गिरदावरी में बड़ा फर्जीवाड़ा? खेत में मक्का, रिकॉर्ड में धान खाली जमीन पर भी दर्ज फसल*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*गिरदावरी में बड़ा फर्जीवाड़ा? खेत में मक्का, रिकॉर्ड में धान खाली जमीन पर भी दर्ज फसल*

*सर्वेयर की आईडी से हुई गिरदावरी को पटवारी ने बनाया आधार, ग्रामीणों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग*


जबेरा से प्रवीण दुबे की रिपोर्ट

दमोह/जबेरा/सिंग्रामपुर। जबेरा तहसील क्षेत्र के ग्राम चौरई, अलोनी, सांवरा, तांवरा, जमुनिया, कलूमर सहित आसपास के कई गांवों में फसल गिरदावरी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई खेतों में मौके पर मक्का की फसल खड़ी है, जबकि ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में उन्हीं जमीनों पर धान की फसल दर्ज दिखाई दे रही है। इतना ही नहीं, कुछ ऐसी जमीनों पर भी धान की फसल दर्ज होने का दावा किया जा रहा है, जहां मौके पर कोई फसल नहीं है।

ग्रामीणों के अनुसार संबंधित क्षेत्रों में गिरदावरी सर्वेयर की आईडी से की गई और पटवारी स्तर पर सर्वेयर द्वारा दर्ज जानकारी को आधार मानकर रिकॉर्ड को आगे बढ़ाया गया। मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ ऑनलाइन रिकॉर्ड और खेत में मौजूद वास्तविक फसल का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।

खेत में मक्का, ऑनलाइन रिकॉर्ड में धान

ग्रामीणों द्वारा बताए गए मामलों में ग्राम पंचायत चौरई के धीरज जॉनसन के खेत का मामला भी सामने आया है। बताया गया कि खसरा क्रमांक 36, रकबा करीब 4.420 हेक्टेयर में मौके पर मक्का की फसल होने की जानकारी सामने आई, जबकि ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में उक्त भूमि पर धान की फसल दर्ज दिखाई दे रही है।

इसी प्रकार अर्जुन सिंह पिता झुन्नी लाल सहित अन्य किसानों की जमीनों में भी मौके पर मौजूद फसल और ऑनलाइन दर्ज फसल में अंतर होने का दावा किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में मक्का का रकबा काफी अधिक है, लेकिन ऑनलाइन गिरदावरी में बड़ी मात्रा में धान का रकबा दर्ज दिखाई दे रहा है। ऐसे में वास्तविक स्थिति जानने के लिए रिकॉर्ड और खेतों का मिलान जरूरी है।

खाली जमीन पर भी धान दर्ज होने का दावा

मामले को लेकर सबसे गंभीर सवाल उन जमीनों को लेकर उठाए जा रहे हैं, जहां ग्रामीणों के अनुसार मौके पर कोई फसल मौजूद नहीं है, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में धान दर्ज है।

चौरई ग्राम पंचायत के समीप खसरा क्रमांक 96, रकबा करीब 1.40 हेक्टेयर भूमि के संबंध में ग्रामीणों ने दावा किया कि मौके पर भूमि रिक्त पड़ी है, जबकि ऑनलाइन सरकारी रिकॉर्ड में वहां धान की फसल दर्ज दिखाई दे रही है।

इसी तरह दुर्गा प्रसाद पिता मंगल विश्वकर्मा के खसरा क्रमांक 92, रकबा करीब 1.40 हेक्टेयर में मौके पर लगभग आधे हिस्से में धान और आधा हिस्सा रिक्त होने की बात कही गई। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में पूरे खसरे में धान की फसल दर्ज है।

हालांकि इन सभी दावों की प्रशासनिक स्तर पर स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। वास्तविक स्थिति जांच और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सर्वेयर की आईडी से हुई गिरदावरी, पटवारी ने बताई प्रक्रिया

मामले को लेकर गुबरा पटवारी देवेंद्र सिंह मरकाम से जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि चौरई, अलोनी, कल्लूमर, भैंसा, तांवरा, सांवरा और जमुनिया क्षेत्र में करीब साढ़े तीन हजार हेक्टेयर भूमि आती है। उनके अनुसार इतनी बड़ी भूमि पर प्रत्येक खेत तक पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से सत्यापन करना संभव नहीं है।

पटवारी के अनुसार सर्वेयर द्वारा गिरदावरी की जाती है और उसी जानकारी के आधार पर रिकॉर्ड को आगे बढ़ाया जाता है।

पटवारी के इस कथन के बाद यह सवाल भी सामने आया है कि यदि सर्वेयर स्तर पर दर्ज जानकारी और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर रह जाता है तो ऐसी स्थिति में सत्यापन और जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी।

ग्रामीणों ने बिचौलियों को लाभ पहुंचने की आशंका जताई

ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि फसल की वास्तविक स्थिति से अलग जानकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज होने से सरकारी आंकड़ों के साथ-साथ किसानों और फसल से जुड़े अन्य हितधारकों पर भी असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने कुछ मामलों में बिचौलियों या अन्य संबंधित लोगों को लाभ पहुंचने की आशंका भी व्यक्त की है।

हालांकि इस आशंका की भी स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि होना बाकी है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।

हजारों हेक्टेयर भूमि की गिरदावरी जांच के घेरे में

ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र के कई गांवों में यदि मौके पर मक्का का रकबा अधिक है और ऑनलाइन रिकॉर्ड में उसके स्थान पर धान दर्ज है, तो ग्रामीणों के अनुसार यह मामला कुछ खेतों तक सीमित नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि पूरे क्षेत्र में दर्ज गिरदावरी की नमूना जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि सर्वेयर की आईडी से की गई गिरदावरी, उसके आधार पर पटवारी स्तर पर आगे बढ़ाए गए रिकॉर्ड तथा ऑनलाइन दर्ज फसल का मिलान कराया जाए। जिन मामलों में रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक फसल में अंतर पाया जाए, वहां नियमानुसार रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के साथ जिम्मेदारी भी तय की जाए।

नायब तहसीलदार ने कहा—जांच टीम गठित कर होगी कार्रवाई

मामला सिंग्रामपुर नायब तहसीलदार अटल वर्मा के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने कहा कि यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी और जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

नायब तहसीलदार अटल वर्मा ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अब प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम की रिपोर्ट पर पूरे मामले की दिशा निर्भर करेगी। जांच और मौके के भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि ऑनलाइन गिरदावरी में दर्ज फसल और खेत में मौजूद वास्तविक फसल के बीच अंतर किन कारणों से हुआ तथा इसमें किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है या नहीं।

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Comment

Share This

Recent Post

*श्री शिव साईं धाम में श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का हुआ भावपूर्ण वर्णन* *पितृपक्ष में श्री शिव साईं सेवाभाव परिवार द्वारा प्रतिदिन रेलवे स्टेशन पर किया जा रहा प्रसाद वितरण*

*श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा भक्ति का संदेश, प्रह्लाद चरित्र व नरसिंह अवतार ने मोहा मन* *विदुर चरित्र, अजामिल उपाख्यान और भगवान नरसिंह अवतार का हुआ भावपूर्ण वर्णन, भजन-कीर्तन और जयकारों से भक्तिमय हुआ कथा पंडाल*