Home » अपराध » Mp » *श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा भक्ति का संदेश, प्रह्लाद चरित्र व नरसिंह अवतार ने मोहा मन* *विदुर चरित्र, अजामिल उपाख्यान और भगवान नरसिंह अवतार का हुआ भावपूर्ण वर्णन, भजन-कीर्तन और जयकारों से भक्तिमय हुआ कथा पंडाल*

*श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा भक्ति का संदेश, प्रह्लाद चरित्र व नरसिंह अवतार ने मोहा मन* *विदुर चरित्र, अजामिल उपाख्यान और भगवान नरसिंह अवतार का हुआ भावपूर्ण वर्णन, भजन-कीर्तन और जयकारों से भक्तिमय हुआ कथा पंडाल*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा भक्ति का संदेश, प्रह्लाद चरित्र व नरसिंह अवतार ने मोहा मन*

*विदुर चरित्र, अजामिल उपाख्यान और भगवान नरसिंह अवतार का हुआ भावपूर्ण वर्णन, भजन-कीर्तन और जयकारों से भक्तिमय हुआ कथा पंडाल*

अखलेश घोष

दमोह। पितृपक्ष के पावन अवसर पर प्रतिवर्षानुसार श्री शिव साईं धाम, बेलाताल टापू दमोह में पितरों के निमित्त आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास पंडित श्री कमलेश्वरानंद जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रेरणादायक प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, सत्य, नीति और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

कथा के दौरान विदुर चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए पंडित श्री कमलेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि विदुर जी ने सदैव सत्य, नीति, धर्म और भगवान की भक्ति को अपने जीवन का आधार बनाया। उन्होंने अपने ज्ञान, विवेक और नीति के माध्यम से समाज को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति विदुर जी की अटूट भक्ति और उनका सरल एवं सात्विक जीवन श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणादायक बताया गया।

इसके पश्चात कथा व्यास ने अजामिल उपाख्यान का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने भगवान के नाम-स्मरण की महिमा बताते हुए कहा कि मनुष्य को जीवन में सदैव सत्कर्म, सदाचार और भगवद्भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। अजामिल के जीवन प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान के नाम की शक्ति और भक्ति के महत्व से अवगत कराया।

कथा का सबसे भावपूर्ण प्रसंग भक्त प्रह्लाद चरित्र रहा। महाराज जी ने बताया कि बालक प्रह्लाद ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान विष्णु की भक्ति का त्याग नहीं किया। पिता हिरण्यकशिपु द्वारा अनेक प्रकार की यातनाएं दिए जाने के बावजूद प्रह्लाद की आस्था और भगवान के प्रति विश्वास अडिग रहा। इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को संदेश दिया गया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर के प्रति विश्वास और भक्ति बनाए रखनी चाहिए।

इसी क्रम में भगवान श्री नरसिंह अवतार की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। हिरण्यकशिपु के अत्याचारों से भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप में प्रकट होकर उसका अंत किया। महाराज जी ने नरसिंह अवतार के माध्यम से धर्म की रक्षा, अधर्म के विनाश तथा भक्तों के प्रति भगवान की कृपा का संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचाया।

प्रह्लाद चरित्र और नरसिंह अवतार के प्रसंग के दौरान कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों से श्री शिव साईं धाम का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर अपने पितरों की शांति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना की।

पितृपक्ष के अवसर पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन का उद्देश्य पितरों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता अर्पित करने के साथ ही श्रीमद्भागवत महापुराण के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक एवं धार्मिक संदेश प्रदान करना है।

कथा का आयोजन 30 सितंबर से 6 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे से हरि इच्छा तक किया जा रहा है। आयोजन समिति ने समस्त श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल पर पहुंचकर श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण करने और धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।

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