— प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
श्री शिव साईं धाम में श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का हुआ भावपूर्ण वर्णन
पितृपक्ष में श्री शिव साईं सेवाभाव परिवार द्वारा प्रतिदिन रेलवे स्टेशन पर किया जा रहा प्रसाद वितरण
दमोह। पितृपक्ष के पावन अवसर पर पितरों के निमित्त श्री शिव साईं धाम, बेलाताल टापू दमोह में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण एवं भक्तिमय वर्णन किया गया। बुंदेलखंड के प्रसिद्ध कथा व्यास पंडित श्री कमलेश्वरानंद जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रेरणादायक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, संस्कार और सद्कर्मों का संदेश दिया।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य प्रसंग का वर्णन करते हुए पंडित श्री कमलेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म, अत्याचार और पाप का प्रभाव बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना तथा भक्तों के कल्याण के लिए अवतार धारण करते हैं। उन्होंने मथुरा के राजा कंस के अत्याचार, देवकी और वसुदेव के कारावास तथा भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य प्राकट्य की कथा का विस्तार से वर्णन किया।
महाराज श्री ने बताया कि भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में भगवान विष्णु ने देवकी के आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण अवतार धारण किया। भगवान के जन्म के साथ ही कारागार के बंधन खुल गए और पहरेदार निद्रा में लीन हो गए। इसके बाद वसुदेव जी नवजात बालक श्रीकृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार गोकुल में नंद बाबा के घर पहुंचाने के लिए निकले। इस दौरान यमुना द्वारा मार्ग प्रदान करना और शेषनाग द्वारा भगवान की रक्षा किए जाने जैसे दिव्य प्रसंगों का भी कथा व्यास ने भावपूर्ण वर्णन किया।
कृष्ण जन्मोत्सव पर गूंजे जयकारे
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग आते ही श्री शिव साईं धाम का वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया। कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति में भावविभोर नजर आए। जैसे ही भगवान के प्राकट्य का प्रसंग आया, श्रद्धालुओं ने “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष के साथ जन्मोत्सव मनाया।
भजनों, शंखध्वनि और जयकारों से कथा स्थल गूंज उठा। नंदोत्सव की झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशियां मनाते हुए भक्ति और उल्लास का अनुभव किया।
भरत चरित्र से दिया भक्ति और वैराग्य का संदेश
कथा के दौरान पंडित श्री कमलेश्वरानंद जी महाराज ने भरत चरित्र का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में भक्ति, त्याग, वैराग्य और प्रभु के प्रति समर्पण का विशेष महत्व है। राजा भरत के जीवन प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर ईश्वर की भक्ति, सद्कर्म और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन को केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं तक सीमित न रखकर उसे परोपकार, सेवा, भक्ति और सदाचार के कार्यों में लगाना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म और संस्कारों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी गई।
पितृपक्ष में रेलवे स्टेशन पर सेवा कार्य
श्रीमद्भागवत कथा आयोजन के साथ ही श्री शिव साईं सेवाभाव परिवार द्वारा पितृपक्ष के अवसर पर सेवा कार्य भी निरंतर किया जा रहा है। परिवार के सदस्यों द्वारा प्रतिदिन दमोह रेलवे स्टेशन पर जरूरतमंदों, यात्रियों एवं अन्य उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया जा रहा है।
सेवाभाव परिवार के सदस्यों के अनुसार पितृपक्ष में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ जरूरतमंदों की सेवा और भोजन-प्रसाद वितरण को भी सेवा एवं परोपकार की भावना से जोड़ा गया है। परिवार का कहना है कि भक्ति और सेवा एक-दूसरे के पूरक हैं तथा मानव सेवा के माध्यम से करुणा, सहयोग और परोपकार की भावना को आगे बढ़ाया जा सकता है।
श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पहुंचकर कथा का श्रवण कर रहे हैं। श्री शिव साईं धाम परिसर में कथा, भजन, कीर्तन और धार्मिक गतिविधियों के चलते निरंतर भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
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