—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
छेड़खानी से तंग आकर छात्रा ने लगाया फंदा, मौसिया पर लगाया शोषण का आरोप
– हटा थाना क्षेत्र की दर्दनाक घटना, सुसाइड नोट में दर्ज किए गए आखिरी शब्द – “अब सहा नहीं जाता”
दमोह।
जिले के हटा थाना क्षेत्र के एक गाँव में घटित एक हृदय विदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली 17 वर्षीय छात्रा ने शनिवार की सुबह अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका के पास से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने अपने मौसिया (मौसी के पति) पर लगातार छेड़खानी और मानसिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है।
सुसाइड नोट में लिखा – “मुझे अब जीना नहीं है”
छात्रा द्वारा छोड़े गए पत्र में लिखा है –
> “मौसिया मुझे परेशान करता है, जब भी आता है छेड़खानी करता है। मैंने कई बार सबको बताने की कोशिश की, पर किसी ने भरोसा नहीं किया। अब मुझसे यह सब और सहा नहीं जाता।”
इस भावनात्मक पंक्ति ने हर किसी का दिल दहला दिया। छात्रा के इस कदम से परिवार सहित पूरा गाँव शोक और आक्रोश में डूब गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही मचा हड़कंप
घटना की सूचना मिलते ही हटा थाना पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। इसके बाद शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच प्रारंभ कर दी है।
परिजनों ने आरोपी मौसिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मृतका के पिता ने बताया कि उनकी बेटी पिछले कुछ दिनों से बहुत चुपचाप रहने लगी थी और पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रही थी।
गाँव में आक्रोश का माहौल
घटना की जानकारी फैलते ही ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। महिला संगठनों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए इसे महिला सुरक्षा की विफलता बताया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी युवक वर्तमान में फरार है। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
थाना प्रभारी का बयान
थाना प्रभारी ने बताया –
> “छात्रा द्वारा छोड़ा गया सुसाइड नोट बरामद किया गया है। उसमें स्पष्ट रूप से आरोपी का नाम लिखा है। प्रारंभिक जांच के बाद धारा 306 (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करना) एवं 354 (छेड़छाड़) के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।”
समाज में उठे सवाल
यह घटना फिर एक बार यह सवाल खड़ा करती है कि आज भी बेटियाँ अपने ही परिचितों से असुरक्षित क्यों हैं? परिवार और समाज में संवाद की कमी, भय और शर्म के कारण कई बेटियाँ ऐसे अत्याचार झेलने पर मजबूर हैं।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्कूलों और गाँवों में नियमित रूप से लैंगिक संवेदनशीलता और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि बेटियाँ खुलकर अपनी बात कह सकें और अपराधियों को सजा मिल सके।
????स्थान: हटा थाना क्षेत्र, जिला दमोह (म.प्र.)
????️ तिथि: शुक्रवार–शनिवार की दरम्यानी रात
????♀️ जांच: पुलिस जांच जारी, आरोपी फरार













































