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*दमोह में कलेक्टर का सख्त एक्शन कन्या छात्रावास में औचक निरीक्षण भोजन चखकर परखी गुणवत्ता*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज दमोह—

*दमोह में कलेक्टर का सख्त एक्शन कन्या छात्रावास में औचक निरीक्षण भोजन चखकर परखी गुणवत्ता*

*नवागत कलेक्टर प्रताप नारायण यादव का कड़ा रुख व्यवस्थाओं में लापरवाही पर अधिकारियों को फटकार*

दमोह, 17 अप्रैल 2026।
मध्यप्रदेश के दमोह जिला मुख्यालय पर प्रशासन अब सख्त तेवर में नजर आ रहा है। नवागत कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने शुक्रवार को अनुसूचित जाति महाविद्यालयीन कन्या छात्रावास का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत परखी। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और तत्काल सुधार के सख्त निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने छात्रावास में रह रही छात्राओं से सीधे बातचीत की। भोजन, पेयजल, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को लेकर छात्राओं की समस्याएं सुनीं। कई छात्राओं ने व्यवस्थाओं में खामियों की ओर इशारा किया, जिस पर कलेक्टर ने तुरंत संज्ञान लिया।

कलेक्टर ने छात्राओं को परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता स्वयं चखकर परखी। गुणवत्ता पर असंतोष जताते हुए उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि क्या प्रतिदिन यही स्तर बनाए रखा जाता है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि छात्राओं को हर हाल में पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए।

निरीक्षण में छात्रावास परिसर में साफ-सफाई की कमी और सुरक्षा व्यवस्थाओं में खामियां पाई गईं। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रावास जैसी संवेदनशील जगह पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

छात्रावास भवन की जर्जर स्थिति, मरम्मत कार्यों में ढिलाई और पेयजल की समस्या को लेकर भी कलेक्टर ने अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि मरम्मत कार्य प्राथमिकता से कराए जाएं और छात्राओं को स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि छात्राओं की सुरक्षा और सुविधाओं से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सभी कमियों को तुरंत दूर करने और व्यवस्थाओं में ठोस सुधार लाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई कि दोबारा लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस औचक निरीक्षण के जरिए प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि अब केवल कागजी दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। छात्रावास में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

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