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*दमोह के बिजौरी पाठक गांव में दलित दिव्यांग दूल्हे से मारपीट का मामला गरमाया*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*दमोह के बिजौरी पाठक गांव में दलित दिव्यांग दूल्हे से मारपीट का मामला गरमाया*


दमोह/हटा। जिले के हटा थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले बिजौरी पाठक गांव में दलित दिव्यांग दूल्हे को घोड़ी से उतारकर मारपीट करने की घटना ने तूल पकड़ लिया है।

मामले को लेकर अब सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है, वहीं पुलिस प्रशासन भी एक्शन मोड में नजर आ रहा है।

इस घटना पर भीम आर्मी ने संज्ञान लेते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश अध्यक्ष सुनील अस्तेय ने सोशल मीडिया के माध्यम से घटना को गैर-संवैधानिक और निंदनीय बताया।

उन्होंने पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करने, आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी तथा उनके विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के विशेष प्रावधान लागू करने की भी बात कही गई है।

घटना के बाद हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल गांव में तैनात किया गया है।

पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है, हालांकि अधिकांश आरोपी गांव छोड़कर फरार बताए जा रहे हैं।

प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पीड़ित परिवार की सुरक्षा भी बढ़ा दी है। हटा एसडीओपी सौरभ त्रिपाठी भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल भी बिजौरी पाठक गांव पहुंचा।

इस दौरान जिला अध्यक्ष मानक पटेल, ब्लॉक अध्यक्ष, मनु मिश्रा, कल्लन जैन और हटा शहर कांग्रेस अध्यक्ष दीपेश पटेरिया सहित अन्य नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली l

पुलिस अधीक्षक श्रुत कीर्ति सोमवंशी ने बताया कि जिले में सामाजिक समरसता बिगाड़ने के प्रयासों को गंभीरता से लिया जा रहा है।

हटा की इस घटना और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक व भड़काऊ सामग्री को देखते हुए NSA के तहत सख्त कार्रवाई के लिए कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजा जाएगा। यह घटना समाज में व्याप्त भेदभाव और असहिष्णुता को उजागर करती है।

कानून सभी को समान अधिकार देता है, और इस प्रकार की घटनाएं न केवल अपराध हैं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाती हैं। जरूरत है कि समाज एकजुट होकर ऐसी मानसिकता के खिलाफ खड़ा हो और समानता व सम्मान का वातावरण बनाए।

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