—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*नरसिंहगढ़ में “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत वृक्षारोपण व स्वच्छता गतिविधियां आयोजित*
दमोह/नरसिंहगढ़। मध्य प्रदेश शासन के महत्वाकांक्षी “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत नरसिंहगढ़ क्षेत्र में जमीनी स्तर पर विभिन्न पर्यावरणीय गतिविधियों का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन क्षेत्रीय अधिकारी, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सागर श्री अरविन्द सावले के सानिध्य एवं माइसेम सीमेंट प्लांट प्रमुख श्री सुरेश दुबे के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सघन वृक्षारोपण अभियान से हुई, जिसमें फैक्ट्री के 100 से अधिक युवा कर्मचारियों एवं स्थानीय ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके पश्चात ग्राम नरसिंहगढ़ स्थित सोनार नदी घाट पर स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान लगभग 20 बोरियों में पॉलिथीन व अन्य अपशिष्ट एकत्रित कर उन्हें सुरक्षित रूप से फैक्ट्री परिसर में निस्तारित किया गया।
इस अवसर पर पर्यावरण प्रमुख श्री अशोक तिवारी ने उपस्थित ग्रामीणों को प्लास्टिक प्रदूषण रोकने की शपथ दिलाई। उन्होंने अपने विस्तृत संबोधन में माइसेम सीमेंट द्वारा किए जा रहे पर्यावरण संरक्षण के कार्यों की जानकारी देते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलकर इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प दोहराया।
अभियान के तहत प्रशासनिक अधिकारी श्री विकास कुमार एवं श्री आलोक तिवारी ने टीम के साथ विभिन्न गांवों में चौपाल लगाकर जन-जागरूकता अभियान भी चलाया। इस दौरान वृद्ध, युवा, महिलाएं एवं बच्चों की बड़ी संख्या में सहभागिता देखने को मिली, जिससे अभियान के सकारात्मक परिणामों की उम्मीद जताई जा रही है।
माइसेम सीमेंट द्वारा जल संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का लाभ स्थानीय ग्रामीणों को द्वि-फसल सिंचाई के रूप में मिल रहा है, जिससे क्षेत्र में कंपनी के प्रति सकारात्मक वातावरण बना हुआ है।
कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों के लिए क्विज प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें सुहाव गांव के सरपंच श्री लक्ष्मण सिंह ठाकुर द्वारा प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।
उल्लेखनीय है कि “जल गंगा संवर्धन अभियान 2026” प्रदेश में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक चलने वाला 100 दिवसीय जल संरक्षण अभियान है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रारंभ इस अभियान का उद्देश्य जल निकायों का पुनरुद्धार, 10,000 से अधिक चेक डैम का जीर्णोद्धार एवं व्यापक वृक्षारोपण के माध्यम से प्रदेश को जल-समृद्ध बनाना है। जनभागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।












































