—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*सरिया में मूंग फसल का निरीक्षण किसानों को कीट नियंत्रण के दिए गए अहम सुझाव*
दमोह/बटियागढ़। क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन फसलों, विशेषकर मूंग एवं उड़द में बढ़ते कीट प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग की टीम ने सरिया गांव में पहुंचकर फसलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पीएलवी रूपेंद्र सिंह, किसान विनोद उदेनिया, साहब सिंह लोधी के साथ वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी दिनेश पटेल, कृषि विस्तार अधिकारी दीपक सेवानी, कृषि बस्तर अधिकारी रवेंद्र विरला एवं कृषि महाविद्यालय पन्ना के कीटशास्त्र विभाग के विशेषज्ञ डॉ. द्वारका मौजूद रहे।
टीम ने सरिया निवासी किसान घनश्याम सिंह के खेत का निरीक्षण किया, जहां मूंग की फसल में विभिन्न प्रकार के हानिकारक कीटों का प्रकोप देखा गया। विशेषज्ञों के अनुसार प्रमुख कीटों में माहू, सफेद मक्खी, जेसिड तथा फल छेदक कीट शामिल हैं। इन कीटों की पहचान पत्तियों पर छोटे हरे या काले कीड़ों (माहू), सफेद रंग की उड़ने वाली मक्खियों (सफेद मक्खी) और पत्तियों के किनारों का पीला पड़ना (जेसिड) जैसे लक्षणों से की जा सकती है। वहीं फल छेदक कीट फल में छेद कर उसे अंदर से नष्ट कर देते हैं।
कीट प्रकोप के कारण फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे पत्तियां मुड़ने लगती हैं, पीली पड़ जाती हैं, पौधों की वृद्धि रुक जाती है तथा फल सड़ने लगते हैं, जिससे उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका बनी रहती है।
इस दौरान डॉ. द्वारका ने किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि समय पर बुवाई, फसल चक्र अपनाना, खेत की गहरी जुताई तथा संक्रमित पौधों को नष्ट करना जैसे उपाय अपनाकर कीटों के प्रकोप को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही पीले चिपचिपे ट्रैप एवं प्रकाश प्रपंच का उपयोग भी लाभकारी सिद्ध होता है।
वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी दिनेश पटेल ने जैविक उपायों पर जोर देते हुए बताया कि नीम तेल 5 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने तथा ट्राइकोग्रामा जैसे लाभकारी कीटों का प्रयोग करने से भी कीट नियंत्रण में मदद मिलती है।
आवश्यकता पड़ने पर रासायनिक नियंत्रण के तहत इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.4 ग्राम प्रति लीटर, स्पिनोसैड 45 एससी 0.3 मिली प्रति लीटर, थायमेथोक्साम 25 डब्ल्यूजी 0.25 ग्राम प्रति लीटर, फ्लूबेंडियामाइड 39.35 एससी 0.2 मिली प्रति लीटर या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई।
विशेषज्ञों ने किसानों को चेतावनी देते हुए कहा कि कीटनाशकों का उपयोग केवल आवश्यकता अनुसार ही करें और सभी सुरक्षा मानकों का पालन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि समेकित कीट प्रबंधन अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।












































