—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*28वें दीक्षा दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब दमोह हुआ धर्ममय*

दमोह। पूज्य मुनि श्री 108 पद्म सागर जी महाराज का 28वां मुनि दीक्षा दिवस जिले में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज सहित दूर-दराज़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित हुए, जिससे पूरा शहर धर्ममय वातावरण में रंग गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ, जिसे श्रीमती रुपाली जैन, श्रीमती शैली जैन एवं श्रीमती निधि चौधरी ने भक्ति भाव के साथ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में शहर की 18 जैन पाठशालाओं के विद्यार्थियों की सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य एवं नाटिकाओं ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
दीक्षा दिवस के उपलक्ष्य में 28 पात्रों में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा विधिपूर्वक पादप्रक्षालन किया गया, जिसने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री पद्म सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री तात्पर्य सागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन से जुड़े परिजनों का भी श्रद्धापूर्वक सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मंदिर समितियों, महिला मंडलों एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं मुनि श्री पद्म सागर जी महाराज का भावपूर्ण अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर पूज्य क्षुल्लक श्री तात्पर्य सागर जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में मानव जीवन की दुर्लभता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका वास्तविक उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति है। उन्होंने बताया कि दीक्षा केवल बाहरी त्याग नहीं, बल्कि मोह, माया और राग-द्वेष से पूर्ण विरक्ति का मार्ग है।
उन्होंने कहा कि यदि पूर्ण त्याग संभव न हो, तो भी संयम, सदाचार और अहिंसा जैसे मूल्यों को अपनाकर व्यक्ति आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर हो सकता है। साथ ही युवाओं को उन्होंने अच्छे संस्कार अपनाने और धर्म से जुड़ने का संदेश दिया।
तत्पश्चात पूज्य मुनि श्री 108 पद्म सागर जी महाराज ने अपनी दिव्य देशना में नेमावर सिद्ध क्षेत्र में 28 वर्ष पूर्व प्राप्त दीक्षा के भावुक क्षणों को स्मरण करते हुए अपने गुरु पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गुरु कृपा के बिना आत्मोन्नति संभव नहीं है और दीक्षा का क्षण जीवन की दिशा बदलने वाला होता है।
मुनि श्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में स्वाध्याय, पूजा, जप एवं ध्यान को स्थान दें और नई पीढ़ी को धर्म संस्कारों से जोड़ें।
कार्यक्रम के अंत में सभी जैन पाठशालाओं के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। साथ ही बाहर से आए अतिथियों के लिए नन्हे मंदिर परिसर में सुव्यवस्थित भोजन व्यवस्था की गई।
यह आयोजन धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और गुरु भक्ति का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने पूरे दमोह जिले को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।










































