—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*झकझोर देने वाला मामला कलेक्टर बंगले की पुरानी दराज में मिला संदिग्ध मोबाइल जांच में निकला पूर्व कलेक्टर का*
दमोह। जिला मुख्यालय में उस समय हड़कंप मच गया जब कलेक्टर बंगले के एक कमरे की पुरानी दराज से एक संदिग्ध मोबाइल फोन बरामद हुआ। यह मोबाइल वर्तमान कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को उनके बेडरूम में रखी एक पुरानी अलमारी की दराज में मिला। हाल के दिनों में कलेक्टर कार्यालय में कथित जासूसी प्रकरण सामने आने के कारण इस घटना ने प्रशासनिक अमले की चिंता और बढ़ा दी।
मोबाइल मिलने के बाद इसकी पहचान को लेकर तत्काल जांच शुरू की गई। शुरुआत में बंगले से जुड़े किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को मोबाइल के संबंध में कोई जानकारी नहीं थी। इसके बाद बंद पड़े मोबाइल को चार्ज कर चालू किया गया। मोबाइल के वॉलपेपर पर एक बच्ची की तस्वीर दिखाई देने के बाद उसके मालिक की तलाश का प्रयास तेज हुआ।
जांच के दौरान मोबाइल का संबंध वर्ष 2021 में दमोह में पदस्थ रहे तत्कालीन कलेक्टर एस. कृष्ण चैतन्य से जोड़ा गया। उनसे संपर्क करने पर उन्होंने पुष्टि की कि यह मोबाइल उनका ही है, जो उनके कार्यकाल के दौरान कहीं खो गया था।
पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली और किसी भी तरह की सुरक्षा संबंधी आशंका फिलहाल समाप्त हो गई।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में कलेक्टर कार्यालय में कथित जासूसी से जुड़ा मामला सामने आया था, जिसकी जांच अभी भी जारी है।
ऐसे संवेदनशील माहौल में कलेक्टर बंगले के भीतर से मोबाइल मिलना कई सवाल खड़े कर रहा था। हालांकि जांच में मोबाइल का पूर्व कलेक्टर का निकलना राहत भरी खबर साबित हुई।
फिर भी सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछले लगभग पांच वर्षों के दौरान बंगले में पदस्थ रहे अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य कलेक्टरों की नजर इस मोबाइल पर क्यों नहीं पड़ी।
आखिर एक सरकारी आवास के बेडरूम की दराज में रखा मोबाइल इतने लंबे समय तक अनदेखा कैसे रह गया?
यह प्रश्न अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक गलियारों में इस घटनाक्रम को एक हैरान करने वाला और झकझोर देने वाला मामला माना जा रहा है।












































