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*हटा बिजली विभाग में भ्रष्टाचार का करंट रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए एई राजेश कुमार सहाय*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*हटा बिजली विभाग में भ्रष्टाचार का करंट रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए एई राजेश कुमार सहाय*

हटा (दमोह)। आम जनता की जेब पर डाका डालने और सरकारी कुर्सी का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार की दीमक सरकारी तंत्र को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है।

ताजा मामला हटा विद्युत मंडल का है, जहां सहायक यंत्री (AE) राजेश कुमार सहाय को 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

जनता को राहत देने और समस्याओं का समाधान करने के लिए सरकार अधिकारियों को वेतन देती है, लेकिन कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को सेवा नहीं बल्कि कमाई का जरिया समझ बैठते हैं। हटा में हुई यह कार्रवाई ऐसे ही भ्रष्ट मानसिकता वाले तंत्र पर करारा तमाचा है।

बताया जाता है कि बिजली कनेक्शन, बिल सुधार, लाइन संबंधी कार्य और अन्य सेवाओं के लिए आम नागरिकों को अक्सर कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

ऐसे में जब कोई अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्वत मांगता है, तो यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि जनता के विश्वास के साथ खुला विश्वासघात भी है।

लोकायुक्त की टीम ने शिकायत की पुष्टि के बाद जाल बिछाया और जैसे ही रिश्वत की रकम आरोपी अधिकारी तक पहुंची, उसे मौके पर ही दबोच लिया गया। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और भ्रष्टाचार के संरक्षण में पल रहे तंत्र की परतें खुलने लगीं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि एक अधिकारी महज 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया, तो क्या यह केवल एक अकेली घटना है या फिर विभाग में लंबे समय से चल रही उस व्यवस्था की झलक है, जहां काम कराने के लिए लोगों को मजबूरी में जेब ढीली करनी पड़ती है? यह जांच का विषय है, लेकिन जनता के मन में उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सरकारी दफ्तर जनता की सेवा के लिए बने हैं, न कि सुविधा शुल्क की वसूली के अड्डे बनने के लिए। लोकायुक्त की यह कार्रवाई उन सभी भ्रष्ट अधिकारियों के लिए चेतावनी है जो यह समझते हैं कि कुर्सी उन्हें कानून से ऊपर बना देती है।

अब जरूरत केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहने की नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसे मामलों में कठोर विभागीय कार्रवाई हो, अवैध संपत्तियों की जांच हो और दोष सिद्ध होने पर ऐसी सजा मिले जो दूसरों के लिए भी नजीर बने।

हटा की यह घटना केवल एक अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस भ्रष्ट सोच का पर्दाफाश है जो जनता की परेशानी को अपनी कमाई का साधन बना लेती है।

फिलहाल लोकायुक्त की टीम ने भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई की है……?

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