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*खाकी का घमंड या कानून से ऊपर होने का भ्रम? महिला की मदद करने वाले डिप्टी स्टेशन मास्टर को प्लेटफॉर्म पर घसीटना शर्मनाक चार RPF जवान निलंबित*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*खाकी का घमंड या कानून से ऊपर होने का भ्रम? महिला की मदद करने वाले डिप्टी स्टेशन मास्टर को प्लेटफॉर्म पर घसीटना शर्मनाक चार RPF जवान निलंबित*


यूपी आगरा/ आगरा रेलवे स्टेशन पर जो हुआ, उसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कुछ वर्दीधारी कानून के रक्षक हैं या अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने वाले? एक महिला यात्री की जान बचाने और मानवता का परिचय देने वाले डिप्टी स्टेशन मास्टर नरेंद्र चाहर के साथ आरपीएफ जवानों द्वारा कथित रूप से प्लेटफॉर्म पर घसीटकर किया गया दुर्व्यवहार न केवल निंदनीय है, बल्कि पूरे रेलवे तंत्र के लिए शर्म का विषय है।

घटना के अनुसार, एक महिला यात्री सामान खरीदने के लिए ट्रेन से उतरी थी। इसी बीच ट्रेन चल पड़ी। महिला को पीछे छूटता देख डिप्टी स्टेशन मास्टर नरेंद्र चाहर ने तत्काल सूझबूझ दिखाते हुए वॉकी-टॉकी के माध्यम से ट्रेन रुकवाई और महिला की सुरक्षा सुनिश्चित की। लेकिन मानवता निभाने वाले अधिकारी को सम्मान देने के बजाय कुछ आरपीएफ जवानों ने कथित रूप से महिला पर चेन पुलिंग का आरोप लगाया और विरोध करने पर डिप्टी स्टेशन मास्टर को ही अपमानित करते हुए प्लेटफॉर्म पर घसीट डाला।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि एक जिम्मेदार रेलवे अधिकारी के साथ सार्वजनिक रूप से ऐसा व्यवहार किया जा सकता है, तो आम यात्री की सुरक्षा की क्या गारंटी है? क्या वर्दी पहन लेने से किसी को कानून और मर्यादा से ऊपर होने का अधिकार मिल जाता है? यदि घटना का वीडियो सामने नहीं आता, तो क्या यह मामला भी दबा दिया जाता?

वीडियो वायरल होने के बाद रेलवे प्रशासन ने आरोपी आरपीएफ जवान मेघराज, बालकिशन मीणा, बदन सिंह और जितेंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। लेकिन केवल निलंबन से बात खत्म नहीं होनी चाहिए। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी वर्दी की ताकत के दम पर अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने का साहस न कर सके।

यह घटना स्पष्ट संदेश देती है कि वर्दी का सम्मान तभी तक है, जब तक उसका उपयोग जनता की सुरक्षा और कानून के पालन के लिए किया जाए। जब वही वर्दी भय, दबाव और दुर्व्यवहार का प्रतीक बनने लगे, तो उस पर कठोर कार्रवाई करना प्रशासन की जिम्मेदारी बन जाती है।

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