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*पिता की जमीन को लेकर विवाद में गई नीता लोधी की जान? गर्म चाय डालने के आरोप तीन बच्चों के सिर से उठा मां का साया*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*पिता की जमीन को लेकर विवाद में गई नीता लोधी की जान? गर्म चाय डालने के आरोप तीन बच्चों के सिर से उठा मां का साया*

*10 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष के बाद जबलपुर में तोड़ा दम, मायके पक्ष ने मड़ियादो–फतेहपुर मार्ग पर किया चक्काजाम पुलिस ने शुरू की जांच*

दमोह/मड़ियादो। दमोह जिले के मड़ियादो थाना क्षेत्र के ग्राम महुआखेड़ा में 25 वर्षीय नीता लोधी की उपचार के दौरान मौत के बाद मामला गंभीर हो गया है। मृतका के मायके पक्ष ने उसके पति रामसिंह लोधी और चाचा ससुर रघुराज लोधी पर प्रताड़ित करने तथा खौलती चाय डालकर जलाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि नीता के पिता की जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। हालांकि, जमीन विवाद और महिला की मौत के बीच संबंध को लेकर पुलिस की जांच अभी जारी है।

नीता की मौत के बाद बुधवार, 21 अक्टूबर को मायके पक्ष के लोगों ने महुआखेड़ा में विरोध प्रदर्शन करते हुए मड़ियादो–फतेहपुर मार्ग पर पावर हाउस के पास चक्काजाम कर दिया। परिजन आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग कर रहे थे। विरोध के चलते मृतका का अंतिम संस्कार भी नहीं हो सका।

11 अक्टूबर को झुलसी हालत में अस्पताल में कराया गया था भर्ती

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम महुआखेड़ा निवासी नीता लोधी को 11 अक्टूबर को गंभीर रूप से झुलसी हालत में हटा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने के कारण उसे दमोह जिला अस्पताल रेफर किया गया। यहां से भी स्थिति में सुधार नहीं होने पर तीन दिन बाद जबलपुर रेफर कर दिया गया।

जबलपुर में उपचार के दौरान बुधवार, 21 अक्टूबर को नीता ने दम तोड़ दिया। करीब 10 दिनों तक चले उपचार के बाद उसकी मौत की खबर गांव पहुंची तो परिवार में मातम छा गया। मृतका के तीन छोटे बच्चे हैं, जिनके सिर से मां का साया उठ गया है।

पति और चाचा ससुर पर खौलती चाय डालने का आरोप

मृतका के चाचा सुरेंद्र लोधी ने आरोप लगाया कि 11 अक्टूबर की सुबह नीता के पति रामसिंह लोधी और उसके चाचा ससुर रघुराज लोधी ने कथित तौर पर उसके ऊपर खौलती हुई चाय की पूरी गंजी उड़ेल दी थी। इससे वह बुरी तरह झुलस गई।

परिजनों का कहना है कि घटना के बाद नीता ने उन्हें अपनी स्थिति के बारे में बताया था। चाचा के अनुसार, वीडियो कॉल के दौरान भी नीता ने जमीन को लेकर हुए विवाद और गर्म चाय डालने की बात कही थी।

मृतका की दादी ने भी ससुराल पक्ष पर पहले से विवाद और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। मायके पक्ष ने दहेज प्रताड़ना की आशंका भी जताई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और घटना के वास्तविक कारणों का निर्धारण पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।

पिता की जमीन को लेकर विवाद होने का दावा

मृतका के चाचा सुरेंद्र लोधी के अनुसार, नीता के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था। उन्होंने बताया कि नीता के परिवार में अब वह और उनकी मां ही उसके सहारे थे।

चाचा का आरोप है कि नीता के पिता की जमीन को उसके नाम कराने को लेकर पति आए दिन विवाद करता था। परिजनों का दावा है कि घटना से पहले भी जमीन को लेकर विवाद हुआ था और नीता ने उन्हें इसकी जानकारी दी थी।

मायके पक्ष को आशंका है कि जमीन के विवाद के कारण ही नीता को प्रताड़ित किया गया। हालांकि, जमीन के स्वामित्व, विवाद की प्रकृति और घटना से उसके संबंध की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों की जांच से ही हो सकेगी।

चक्काजाम के बाद पुलिस ने संभाली स्थिति

नीता की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने मड़ियादो–फतेहपुर मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। वे पति और चाचा ससुर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग कर रहे थे। सूचना मिलने पर मड़ियादो पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाने का प्रयास किया।

करीब एक घंटे की समझाइश के बाद प्रदर्शनकारी सड़क से हटे और यातायात बहाल हो सका। परिजनों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की

मड़ियादो थाना प्रभारी के अनुसार, महिला की मौत के मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस के सामने अब यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि नीता किन परिस्थितियों में झुलसी थी, घटना के समय क्या हुआ था और मायके पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है।

मृत्यु पूर्व बयान दर्ज नहीं होने का मुद्दा भी उठा

मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि महिला के झुलसने के बाद उपचार के दौरान उसके बयान दर्ज किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। इस संबंध में नायब तहसीलदार योगेंद्र चौधरी ने बताया कि उन्हें महिला के झुलसने की जानकारी नहीं मिली थी और उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी उसकी मृत्यु के बाद मिली।

उन्होंने बताया कि गुरुवार को पटवारी के साथ पहुंचकर परिजनों और मायके पक्ष के बयान दर्ज किए जाएंगे।

अब इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि उपचार के दौरान महिला ने चिकित्सकों या अन्य संबंधित व्यक्तियों को क्या बताया था, घटना की सूचना किन अधिकारियों को दी गई थी और मृत्यु से पहले उसके बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया क्यों नहीं हो सकी।

फिलहाल नीता की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन छोटे बच्चों की मां की मौत के मामले में परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं।

पुलिस जांच के दौरान घटना की परिस्थितियों, जमीन विवाद, कथित प्रताड़ना और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होना बाकी है।

आरोपों की पुष्टि होने और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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