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*कार्यक्रम के दौरान बच्चों को सिखाएं जीवन जीने के गुण किशोरावस्था में अपने बच्चों को मित्र बनाए*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*कार्यक्रम के दौरान बच्चों को सिखाएं जीवन जीने के गुण किशोरावस्था में अपने बच्चों को मित्र बनाए*

*ऐसे कार्यक्रम निरंतर स्कूलों में हो जिसमें बच्चों को जीवन जीने की कला व मार्गदर्शन मिले*

दमोह के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल,टोरी में सुश्री यशवंती मोहबे ने किशोरावस्था से जुड़े भ्रम, चुनौतियाँ, गलतियाँ और समाधान पर विद्यार्थियों को जागरूक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमे सभी शिक्षक गण उपस्थित रहे

आज शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल टोरी में वार्डन सुश्री यशवंती मोहबे द्वारा एक महत्वपूर्ण और अत्यंत आवश्यक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य था—किशोरावस्था के दौरान बच्चों, विशेष रूप से बालिकाओं, में उत्पन्न होने वाली नासमझी, भ्रम, मानसिक दबाव, गलत फैसलों तथा भावनात्मक असंतुलन को समझना और उनसे बचने हेतु उचित मार्गदर्शन प्रदान करना।

कार्यक्रम की शुरुआत सुश्री मोहबे ने इस बात से की कि किशोरावस्था जीवन का वह समय है जहाँ एक छोटी-सी भूल भी भविष्य पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। इसलिए बच्चों के साथ-साथ माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है

*किशोर अवस्था — अभिशाप या वरदान*

सुश्री मोहबे ने उदाहरणों और वास्तविक जीवन की घटनाओं के माध्यम से बताया कि किशोरावस्था जीवन की सबसे संवेदनशील और परिवर्तनशील अवस्था है।

इस समय बच्चों में भावनात्मक अस्थिरता, जिज्ञासा, शारीरिक व मानसिक परिवर्तन, और स्वतंत्रता की इच्छा बढ़ जाती है। समझ और मार्गदर्शन के अभाव में बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं—जैसे गलत संगति, गलत आदतें, गलत निर्णय, नकारात्मक सोच आदि।
उन्होंने कहा—“नासमझी में उठाया गया एक गलत कदम जीवन को अभिशाप बना सकता है, जबकि समझदारी और सही दिशा में उठाया गया कदम जीवन को वरदान बना देता है।

*बच्चों की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में ले जाने का प्रयास*
बच्चों की प्रतिभा को सही दिशा देने हेतु विद्यालय में—स्पोर्ट्स टीचर,ब्यूटिशियन टीचर,कंप्यूटर टीचर की नियुक्ति की गई है ताकि विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार कौशल विकसित कर सकें और मानसिक ऊर्जा को गलत दिशा में न ले जाएँ।

इन गतिविधियों का उद्देश्य है—बच्चों को व्यस्त और लक्ष्य केंद्रित बनाना आत्मविश्वास विकसित करना प्रतियोगी भावना बढ़ाना करियर के नए अवसर प्रदान करना

*शिक्षा के महत्व को समझाया और भविष्य की नींव*

कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया गया।

सुश्री मोहबे ने कहा—शिक्षा ही जीवन की दिशा तय करती है।

*शिक्षा शेरनी का वह दूध है जो शिक्षा रूपी दूध को पिएगा वह शेर की तरह दहाड़ेगा*

आज का समय अत्यंत बहुमूल्य है क्योंकि पूरी जीवन यात्रा इसी आधार पर टिकी होती है।

यदि विद्यार्थी इस समय को व्यर्थ करेंगे तो उन्हें आगे कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि—

बचपन और किशोरावस्था का समय दोबारा नहीं आता, इसलिए अभी मेहनत करना बेहद जरूरी है। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण और अनुकूल माहौल तैयार करने की प्रेरणा दी गई।

*परीक्षा में असफलता और आत्महत्या जैसी खतरनाक प्रवृत्ति*

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण भाग यह था—विद्यार्थियों को यह समझाना कि असफलता अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का संकेत है।

सुश्री मोहबे ने कहा कि आजकल कई बच्चे परीक्षा में कम अंक आने पर या अपेक्षित परिणाम न मिलने पर मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठा लेते हैं।

यह प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने विस्तार से समझाया—

असफलता हमारे प्रयासों में कमी का संकेत है, न कि हमारे जीवन के महत्व का।

असफल होना यह दर्शाता है कि अभी और मेहनत की आवश्यकता है l

*असफलता एक चुनौती है स्वीकार करो क्या कमी रह गई देखो विचार करो*

हर सफल व्यक्ति ने असफलता का सामना किया है।

जीवन समाप्त करने से समस्याएँ खत्म नहीं होतीं बल्कि परिवार और समाज के लिए और संकट पैदा होते हैं।

*बच्चों को यह संदेश दिया गया कि*

—एक परीक्षा आपका भविष्य तय नहीं करती, बल्कि आपकी एक गलत सोच जीवन खत्म कर सकती हैं।

कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट रूप से बताया गया कि किशोरावस्था में बच्चों द्वारा उठाए गए गलत कदमों के लिए केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि माता-पिता और शिक्षक भी जिम्मेदार होते हैं।

इस उम्र में बच्चों को भावनात्मक सहारे और मार्गदर्शन की जरूरत होती है। संवाद की कमी उन्हें अकेला और असुरक्षित महसूस कराती है।कठोर व्यवहार या दूरी से बच्चे माता-पिता को अपना शत्रु समझने लगते हैं।
बच्चे अपने मन की बातें साझा नहीं कर पाते और गलत दिशा में मुड़ जाते हैं।

माता-पिता को बच्चों के मित्र बनना चाहिए। समय-समय पर उनसे बातचीत करनी चाहिए। बच्चों के मन की बातें ध्यान से सुननी चाहिए। उनकी प्रशंसा करनी चाहिए।
मोबाइल, सोशल मीडिया, दोस्ती और गतिविधियों पर हल्की लेकिन नियमित निगरानी रखनी चाहिए। बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए, ताकि वे खुलकर अपनी समस्याएँ साझा कर सकें।

सुश्री मोहबे ने कहा भागती-दौड़ती जिंदगी में माता-पिता यदि अपने बच्चे को समय नहीं दे पाएंगे, तो बच्चे गलत रास्ते का शिकार हो सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्य देवेंद्र सिंह, राघवेंद्र रॉयल, धर्मेंद्र यादव तथा शकीला खान मैडम ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा—समझ, अनुशासन और लक्ष्य जीवन को सफल बनाते हैं।

किशोरावस्था में लिया गया हर निर्णय जीवनभर प्रभाव डालता है l शिक्षक और माता-पिता का सहयोग बच्चों के लिए सुरक्षा कवच की तरह होता है। विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, मेहनत, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों को अपनाना चाहिए।

यह जागरूकता कार्यक्रम अत्यंत सफल और प्रभावी रहा। इसने न केवल बच्चों को किशोरावस्था की चुनौतियों को समझने में मदद की बल्कि माता-पिता और शिक्षकों को भी अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराया। गलत कदम जीवन को अंधकार में ले जाते हैं, जबकि समझदारी और सही मार्गदर्शन जीवन को उज्ज्वल और सफल बनाता है।

आपके उज्जवल भविष्य की कामनाओं के साथ एमपी अपडेट न्यूज़ आपके साथ तत्पर रहेगा

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