—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्टर के नाम सौंपा गया आवेदन*
दमोह।
श्री देव रामकुमार जानकी रमण मंदिर लोक न्यास, बड़ी शाला सीतानगर (तहसील पथरिया) में कथित भ्रष्टाचार और न्यास की संपत्ति के दुरुपयोग को लेकर कलेक्टर दमोह के नाम एक आवेदन सौंपा गया है।
आवेदन में संतोष बिल्थरे एवं अनुज टंडन पर ट्रस्ट के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
आवेदन में बताया गया कि श्री देव रामकुमार जानकी रमण मंदिर लोक न्यास वर्ष 1959 में लोक न्यास पंजी में पंजीकृत है। इस न्यास के अंतर्गत सीतानगर, रानगिर एवं अन्य गांवों में लगभग 600 एकड़ सिंचित कृषि भूमि है। इसके अलावा न्यास के पास 4 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 20 मोटर पंप, बड़ी मात्रा में कृषि उपकरण, एक महिंद्रा XUV 500 कार, एक महिंद्रा थार वाहन एवं मोटरसाइकिलें हैं। न्यास की वार्षिक आय करोड़ों रुपये बताई गई है।
पूर्व महंत हरिप्रपन्नदास का 21 अक्टूबर 2023 को स्वर्गवास हो गया था। उनके पश्चात अनुज टंडन द्वारा संतोष दास को महंत/मुहत्तिम नियुक्त कराने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसका महंत हरिदास ने विरोध किया।
इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी पथरिया द्वारा 30 अप्रैल 2024 को पारित आदेश को कलेक्टर दमोह ने 13 नवंबर 2024 को निरस्त कर दिया तथा मामले को मध्यप्रदेश लोक न्यास अधिनियम की धारा 26 के अंतर्गत जिला न्यायाधीश दमोह को संदर्भित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि न्यास की संपत्तियों की सुरक्षा एवं प्रबंधन हेतु अनुविभागीय अधिकारी पथरिया को अस्थायी प्रबंधक एवं तहसीलदार पथरिया को सहायक प्रबंधक नियुक्त किया गया है।
इसके बावजूद आरोप है कि प्रशासन द्वारा अब तक न्यास की संपत्तियों का वास्तविक नियंत्रण नहीं लिया गया, जिससे संतोष बिल्थरे एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा न्यास की चल-अचल संपत्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
आवेदन में आरोप लगाया गया कि
पूर्व महंत हरिप्रपन्नदास की तेरहवीं एवं गंगाजली पूजन में लगभग 25 लाख रुपये का फर्जी खर्च दर्शाया गया, जबकि वास्तविक खर्च लगभग 5.30 लाख रुपये बताया गया।
अनाज, कृषि संसाधन एवं गोदाम में रखी सामग्री का मनमाने ढंग से दुरुपयोग किया गया।
मंदिर के राम, लक्ष्मण एवं सीताजी के लगभग 2 किलो सोने के मुकुट खुर्द-बुर्द होने की आशंका जताई गई।
10 अक्टूबर 2024 को पुण्यतिथि कार्यक्रम में भी फर्जी बिल एवं गलत लेखा-जोखा दिखाया गया।
आवेदनकर्ताओं ने मांग की है कि कलेक्टर द्वारा दिए गए आदेशों का सख्ती से पालन कराते हुए न्यास की संपूर्ण संपत्ति प्रशासन के अधीन ली जाए, निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा भगवान और लोक न्यास की संपत्ति को सुरक्षित किया जाए।













































