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*केन–बेतवा लिंक परियोजना से पीड़ित सियामरसिंगी के आदिवासियों ने भरी हुंकार*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*केन–बेतवा लिंक परियोजना से पीड़ित सियामरसिंगी के आदिवासियों ने भरी हुंकार*

*वन विभाग की तानाशाही रोकने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन*

दमोह।
जन संगठन एकता परिषद के बैनर तले केन–बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित ग्राम सियामरसिंगी के वंचित आदिवासियों ने जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन जिला पंचायत सीईओ प्रतीत फुलपगारे द्वारा प्राप्त किया गया, जिन्होंने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर म.प्र. एकता परिषद के जिला अध्यक्ष सुजात खान, ग्राम मुखिया मकुन्दी आदिवासी एवं तांतू सिंह ने बताया कि ग्राम सियामरसिंगी, पंचायत बछामा, ब्लॉक हटा, जिला दमोह के आदिवासी परिवार वर्षों से शासकीय भूमि पर अपने दादा–परदादाओं के समय से काबिज होकर कृषि कार्य करते आ रहे हैं। इन आदिवासियों द्वारा कई बार शासन–प्रशासन से भू-स्वामित्व हक (पट्टा) दिए जाने की मांग की गई तथा वन अधिकार अधिनियम के तहत दावे भी प्रस्तुत किए गए, लेकिन आज तक इन दावों का निराकरण नहीं हुआ।

आदिवासियों का आरोप है कि अब वन विभाग मनमानी व तानाशाही रवैया अपनाते हुए उनकी खेती की जमीन जबरन छीनने पर आमादा है। भूमि पर जबरदस्ती खखरी, बाड़ी और तार फेंसिंग कर उन्हें बेदखल किया जा रहा है तथा झूठे प्रकरणों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं। अधिकारियों द्वारा यह कहकर दबाव बनाया जा रहा है कि यह भूमि अब केन–बेतवा लिंक परियोजना के लिए आवंटित कर दी गई है।

सुजात खान ने कहा कि एक ओर कलेक्टर द्वारा लंबित वन अधिकार दावों एवं भू-राजस्व मामलों के निराकरण के लिए जिला समन्वय बैठक में समाधान की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं आदेशों की अनदेखी कर वन विभाग गरीब और वंचित आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल कर रहा है। इससे जिलेभर के वनवासी और आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है।

ज्ञापन में मांग की गई कि आदिवासियों को तत्काल बेदखल करने की कार्रवाई रोकी जाए, उनके वन अधिकार दावों का समय-सीमा में निराकरण किया जाए तथा यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं तो आदिवासियों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

इस दौरान जग्गू आदिवासी, गौरीशंकर, बल्लू आदिवासी, कीरत सिंह आदिवासी, मानक सिंह, श्यामले, रतन सिंह, हाकम सिंह, हरिराम, गिरजा रानी, मुलाम सिंह, राधा रानी, अशोक रानी, प्रकाश रानी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला–पुरुष उपस्थित रहे।

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