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*जटाशंकर मंदिर समिति को भंग करने की चर्चा के बीच महाकाल मित्र मंडल सेवा समिति ने उठाई आवाज*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*जटाशंकर मंदिर समिति को भंग करने की चर्चा के बीच महाकाल मित्र मंडल सेवा समिति ने उठाई आवाज*

*कलेक्टर से की जनसेवा कार्यों को जारी रखने की मांग*


दमोह। जटाशंकर मंदिर समिति को भंग कर प्रशासक नियुक्त किए जाने की चर्चाओं के बीच महाकाल मित्र मंडल सेवा समिति ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपा है। समिति का कहना है कि मंदिर परिसर में वर्षों से संचालित हो रही जनकल्याणकारी एवं धार्मिक गतिविधियों को किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इनसे बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।

समिति के अध्यक्ष साहिल विरमानी द्वारा प्रस्तुत आवेदन में कहा गया है कि जटाशंकर मंदिर परिसर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सेवा का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। मंदिर परिसर में संचालित विभिन्न सेवाओं के माध्यम से गरीब, असहाय, वृद्ध एवं जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है।

“भोले की रसोई” बंद होने की आशंका पर चिंता

आवेदन में विशेष रूप से “भोले की रसोई” का उल्लेख किया गया है, जिसका संचालन महाकाल मित्र मंडल सेवा समिति द्वारा किया जाता है। समिति के अनुसार यह रसोई पूरी तरह निःस्वार्थ भाव से संचालित होती है और यहां मात्र 5 रुपये में जरूरतमंदों को पौष्टिक एवं सम्मानजनक भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

समिति का कहना है कि यह सेवा केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के लिए एक सहारा बन चुकी है। यदि प्रशासनिक बदलाव के कारण इस व्यवस्था में हस्तक्षेप होता है तो सबसे अधिक नुकसान उन लोगों को होगा जो प्रतिदिन इस सेवा का लाभ प्राप्त करते हैं।

महाकाल मित्र मंडल सेवा समिति ने आवेदन में बताया कि संस्था लंबे समय से विभिन्न सामाजिक और मानवीय कार्यों में सक्रिय है। समिति द्वारा लावारिस शवों का अंतिम संस्कार, रक्तदान शिविरों का आयोजन, जरूरतमंद मरीजों की सहायता तथा अन्य सामाजिक गतिविधियों का संचालन किया जाता रहा है।

समिति का दावा है कि उसने समाज सेवा के क्षेत्र में एक जिम्मेदार और संवेदनशील संस्था के रूप में पहचान बनाई है तथा उसके सभी कार्य पूर्ण पारदर्शिता और जनहित की भावना से संचालित होते हैं।

समिति ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि यदि मंदिर समिति के संबंध में कोई प्रशासनिक निर्णय लिया जाता है तो उसे जनहित और धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखकर लागू किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि मंदिर परिसर में संचालित सामाजिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

आवेदन में यह भी मांग की गई है कि “भोले की रसोई” के संचालन की जिम्मेदारी पूर्ववत महाकाल मित्र मंडल सेवा समिति को ही सौंपी जाए और इसके संचालन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

समिति ने अपने आवेदन में कहा है कि प्रशासन के संवेदनशील एवं सकारात्मक हस्तक्षेप से न केवल जनसामान्य का विश्वास बना रहेगा, बल्कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को भी निरंतर सहायता मिलती रहेगी। संस्था का मानना है कि सामाजिक सेवा और धार्मिक गतिविधियों के बीच समन्वय बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

अंत में समिति ने कलेक्टर से सहानुभूतिपूर्वक आवेदन पर विचार कर उचित कार्रवाई करने तथा मंदिर परिसर में चल रही सेवा गतिविधियों की निरंतरता सुनिश्चित करने की मांग की है।

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