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*वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर उठीं आदिवासी समाज की आवाज़ मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए तीन महत्वपूर्ण ज्ञापन*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर उठीं आदिवासी समाज की आवाज़ मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए तीन महत्वपूर्ण ज्ञापन*

***झलोन से मुकेश जैन की रिपोर्ट***

दमोह/कुम्हारी अमर शहीद वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती के 462वें बलिदान दिवस के अवसर पर ग्राम कुम्हारी (विकासखंड पटेरा) में आयोजित विशाल सामाजिक सम्मेलन में जनजातीय समाज ने अपने अधिकारों, सम्मान और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया। सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन के नाम तीन महत्वपूर्ण ज्ञापन तहसीलदार पटेरा एवं जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि गौरव पटेल को सौंपे गए।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महारानी रानी दुर्गावती का जीवन साहस, स्वाभिमान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है। उनके बलिदान दिवस पर समाज ने अपने संवैधानिक अधिकारों और जनहित से जुड़े मुद्दों को शासन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

पहले ज्ञापन में दमोह जिला कलेक्ट्रेट परिसर में महारानी रानी दुर्गावती की भव्य प्रतिमा स्थापित करने की मांग की गई। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि कलेक्ट्रेट परिसर पहले से ही वीरांगना के नाम से पहचाना जाता है, ऐसे में वहां उनकी प्रतिमा स्थापित होने से जिले की ऐतिहासिक पहचान और मजबूत होगी तथा युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।

दूसरे ज्ञापन में आदिवासी एवं वनाश्रित परिवारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। समाज ने वनाधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित और निरस्त वनाधिकार दावों की पुनः सुनवाई तथा पात्र हितग्राहियों को शीघ्र वनाधिकार पट्टे प्रदान करने की मांग की।

इसके अलावा जिला मुख्यालय दमोह में आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की स्थापना, नव-निर्मित मेडिकल कॉलेज का नामकरण अमर शहीद राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह के नाम पर करने तथा आदिवासी समाज के लिए जिला स्तरीय सामुदायिक भवन निर्माण की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।

तीसरे ज्ञापन में केसली तहसील के ग्राम मंगेला निवासी आदिवासी युवक स्वर्गीय संजू गौड़ की संदिग्ध मृत्यु के मामले को गंभीर बताते हुए विशेष जांच दल (SIT) गठित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।

ज्ञापन में मृतक की पत्नी तुलसा गौड़ की गिरफ्तारी की स्वतंत्र समीक्षा, वास्तविक आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी, दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा एवं आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग भी शामिल रही।

सम्मेलन में मौजूद समाजजनों ने कहा कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, ऐतिहासिक महापुरुषों का सम्मान और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। समाज ने उम्मीद जताई कि प्रदेश सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।

कार्यक्रम के अंत में वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा शिक्षा, संगठन, सामाजिक एकता और अधिकारों की रक्षा के लिए सतत संघर्ष का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि गौरव पटेल, जिला पंचायत सदस्य साहिल सिंह लोधी, जिला पंचायत सदस्य बबीता सिंह पोर्ते, कौशल सिंह पोर्ते, प्रकाश सिंह धुर्वे, लखन सिंह मरकाम, धीरज सिंह सरूता, जग्गन सिंह पहलवान, मुंशीलाल तेकाम, चन्द्रभान सिंह तेकाम, अनरत सिंह एडाली, महेंद्र सिंह मरकाम, पूजा मरावी, शंकर सिंह तेकाम सहित जनजातीय समाज के अनेक पदाधिकारी एवं सैकड़ों की संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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