—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई नर्मदा जल प्रदाय योजना अब लोगों के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण*
*तेंदूखेड़ा में नर्मदा जल योजना बनी परेशानी का कारण गंदा और मटमैला पानी मिलने से लोगों में भारी आक्रोश*
***झलौन | तेंदूखेड़ा से मुकेश जैन की रिपोर्ट***
दमोह/तेंदूखेड़ा नगर में लगभग 45 किलोमीटर दूर लम्हेटाघाट से लाई गई नर्मदा जल प्रदाय योजना नगरवासियों के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बनती जा रही है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई इस महत्वाकांक्षी योजना के बावजूद लोगों को न तो नियमित पेयजल मिल पा रहा है और न ही स्वच्छ पानी उपलब्ध हो रहा है।
नगरवासियों का आरोप है कि कभी पानी की सप्लाई का समय अनिश्चित रहता है, कभी पानी का दबाव इतना कम होता है कि पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता और कई बार निर्धारित समय पर पानी की आपूर्ति ही नहीं होती।
रविवार को वार्ड क्रमांक-1 में उस समय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा, जब नलों से गंदा और मटमैला पानी निकलने लगा। लोगों का कहना है कि जिस नर्मदा जल को फिल्टर कर शुद्ध रूप में उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, वही पानी मिट्टी और अन्य अशुद्धियों से भरा हुआ आ रहा है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
स्थानीय नागरिक राजेंद्र शर्मा ने बताया कि लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई यह योजना पूरी तरह असफल साबित हो रही है। उनका कहना है कि यदि यही राशि नगर के पुराने जलाशय की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में खर्च की जाती, तो आज नगरवासियों को इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने योजना को “पूरी तरह ओपन फेल” बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
वहीं रोशनलाल ने बताया कि दो से तीन दिन के अंतराल में पानी की सप्लाई हो रही है और जो पानी मिल रहा है, वह भी गंदा एवं मटमैला है। उनका कहना है कि ऐसा पानी पीने से लोगों के बीमार होने की आशंका बनी हुई है।
नगरवासियों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद शासन और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। लोगों ने मांग की है कि नर्मदा जल योजना की गुणवत्ता, जल शोधन व्यवस्था और वितरण प्रणाली की तत्काल जांच कराई जाए तथा नगरवासियों को नियमित, स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
इस संबंध में नगर परिषद के उपयंत्री भूपेंद्र सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला।
वहीं एसडीएम सी.जी. गोस्वामी को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।












































