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विद्यालय गेट पर “दारू की ट्यूशन”, शिक्षा के मंदिर में नशे का पाठ्यक्रम

——–सतना से दिनेश शर्मा की रिपोर्ट ———–

विद्यालय गेट पर “दारू की ट्यूशन”, शिक्षा के मंदिर में नशे का पाठ्यक्रम

सतना, बांधवीय गर्जना।

विद्यालय वह स्थान माना जाता है, जहाँ बच्चे किताबों से दोस्ती करना सीखते हैं और संस्कारों का पहला पाठ पढ़ते हैं। लेकिन छिबौरा तहसील के शासकीय विद्यालय मढ़ी संकुल केंद्र का नज़ारा बिल्कुल उलटा है। यहाँ शिक्षा का मंदिर अब “नशे का अड्डा” बन चुका है।

विद्यालय के गेट पर ही वर्षों से विश्वनाथ हरिजन उर्फ़ “छोटे” ने सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा कर दुकान खोल रखी है। किताबें, कॉपियाँ, पेन तो कभी–कभार मिलें, लेकिन शराब, गुटखा और सिगरेट हर समय उपलब्ध रहते हैं। सूत्रों की मानें तो यह कारोबार “शिक्षक आशीर्वाद योजना” के संरक्षण में ही फल-फूल रहा है।

ग्रामीणों ने कई बार सरपंच और स्कूल प्रबंधन से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई की जगह चुप्पी साध ली गई। अंततः परेशान होकर ग्रामीणों ने 20 सितंबर 2025 को पुलिस चौकी छिबौरा में लिखित आवेदन के साथ सामूहिक पंचनामा पेश किया।

अब पूरा गाँव इस इंतज़ार में है कि जिला शिक्षा अधिकारी और चौकी प्रभारी में से कौन बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए आगे आएगा और कौन इस “दारू पाठशाला” के आगे हाथ जोड़कर निकल जाएगा।

सोचने वाली बात यह है कि जब शिक्षा के मंदिर में ही गुटखा और शराब बिकेगी, तो बच्चों की पीढ़ी पढ़ाई में अव्वल होगी या शराबखोरी में?
अगर स्कूलों के गेट पर नशे की घंटी बजेगी, तो आने वाले कल में संस्कार नहीं, बल्कि धुएँ और लत से जकड़ी नई पीढ़ी नज़र आएगी।

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