—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*दमोह में खजाना मिलने की खबर से सनसनी 35 किलो चांदी के दावे पर जांच तेज*
*मजदूर और मकान मालिक की बात न बनने पर मामला पहुंचा सिटी कोतवाली*
Damoh के फुटेरा वार्ड में एक निर्माणाधीन मकान की खुदाई के दौरान कथित तौर पर खजाना मिलने की खबर ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मामला तब और उलझ गया जब मजदूरों और मकान मालिक के दावों में बड़ा अंतर सामने आया। मजदूरों का कहना है कि खुदाई में 30 से 35 किलो चांदी मिली थी, जबकि मकान मालिक और स्कूल शिक्षक आलोक सोनी का दावा है कि मौके से केवल 42 पुराने चांदी के सिक्के ही निकले।
जानकारी के अनुसार, शिक्षक आलोक सोनी अपने पुराने पैतृक मकान को तुड़वाकर नया निर्माण करवा रहे थे। खुदाई के दौरान जमीन से पहले एक खाली घड़ा और फिर एक मटका नुमा पात्र मिलने की बात सामने आई। मजदूरों का आरोप है कि इसी पात्र में भारी मात्रा में चांदी के सिक्के और चांदी की रॉड भरी हुई थी।
मजदूर ओमप्रकाश अठया सहित अन्य श्रमिकों ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि खजाना मिलने के बाद मकान मालिक के परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे और सारा सामान बाल्टी में भरकर अपने कब्जे में ले गए। मजदूरों का यह भी दावा है कि शाम को काम खत्म होने पर उन्हें पांच-पांच सौ रुपये देकर घर भेज दिया गया। बाद में गांव पहुंचकर उन्होंने पूरी घटना लोगों को बताई, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
दूसरी ओर, शिक्षक आलोक सोनी ने पुलिस को बताया कि खुदाई में केवल 42 चांदी के सिक्के मिले थे और उन्होंने स्वयं इसकी सूचना थाने में दी। उनका कहना है कि मजदूरों द्वारा 35 किलो चांदी मिलने की कहानी झूठी और साजिश के तहत फैलाई जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान फिलहाल केवल 42 चांदी के सिक्के ही बरामद किए गए हैं। प्रशासन ने एहतियातन शिक्षक के दो मकानों को सील कर दिया है और पूरे मामले की जांच जारी है।
प्रारंभिक जांच में पुरातत्व विभाग ने बताया कि बरामद सिक्के ब्रिटिश शासनकाल के प्रतीत हो रहे हैं और इनकी उम्र 100 साल से अधिक हो सकती है। पुरातात्विक दृष्टि से इन्हें महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अभी तक मजदूरों द्वारा दावा की गई बड़ी मात्रा में चांदी का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
फिलहाल पूरे शहर में इस कथित खजाने को लेकर चर्चा का माहौल है। अब सभी की नजर पुलिस और प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है, जिससे यह साफ हो सके कि वास्तव में खुदाई में कितना खजाना निकला था और क्या किसी ने उसे छिपाने की कोशिश की।
















































