—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*अजब हटा गजब हटा बिना आदेश के गरीबों के घर हटा गज़ब तमसा*
*गरीबों के घरों पर चली पोकलेन महिलाओं ने चालक को खदेड़ा 3 घंटे रहा चक्काजाम*

हटा (दमोह)। हटा नगर के शास्त्री वार्ड स्थित लाटटेक क्षेत्र में मंगलवार सुबह उस समय हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई, जब एक निजी पोकलेन मशीन अचानक गरीब परिवारों के मकानों को हटाने पहुंच गई। हैरानी की बात यह रही कि मौके पर न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद था और न ही अतिक्रमण हटाने संबंधी कोई अधिकृत आदेश दिखाया गया। कार्रवाई की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में महिलाएं तथा पुरुष मौके पर पहुंच गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही पोकलेन मशीन ने मकानों के समीप पहुंचकर कार्रवाई शुरू करने का प्रयास किया, महिलाओं ने विरोध जताते हुए चालक को खदेड़ दिया। स्थिति तनावपूर्ण हो गई और लोगों ने कार्रवाई को तत्काल रोकने की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मकान हटाने की कार्रवाई बिना किसी वैधानिक आदेश और प्रशासनिक अनुमति के शुरू की गई थी। लोगों का कहना था कि यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जानी थी तो पहले नोटिस और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था। विरोध बढ़ने पर पोकलेन मशीन को रोक दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हटा-रजपुरा मार्ग पर केंद्रीय विद्यालय के पास नाराज लोगों ने चक्काजाम कर दिया। करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
प्रदर्शन कर रहे कुछ स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के पास जनप्रतिनिधियों और उनके परिजनों की जमीन है तथा वहां कॉलोनी विकसित करने की योजना के चलते गरीब परिवारों को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शन में शामिल प्रेमवती आदिवासी, श्यामवती कुशवाहा सहित अन्य महिलाओं ने प्रशासन से न्याय की मांग करते हुए कहा कि गरीबों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
हालांकि आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने अपनी पीड़ा भी व्यक्त की। एक महिला ने बताया कि दो दिन पहले ही उसके घर में शिशु का जन्म हुआ है और अब मकान हटाने की बात कही जा रही है। महिलाओं ने कहा कि बरसात का मौसम शुरू हो चुका है, ऐसे में यदि उनके घर तोड़े गए तो उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो जाएगा।
घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस और राजस्व विभाग का अमला मौके पर पहुंचा। तहसीलदार आलोक जैन ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने संबंधी कोई अधिकृत आदेश जारी नहीं किया गया था। उन्होंने बताया कि यदि प्रशासन द्वारा ऐसी कोई कार्रवाई की जाती तो अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद रहते। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि निजी व्यक्तियों द्वारा कार्रवाई का प्रयास किया गया था, जिसे तत्काल रुकवा दिया गया।
तहसीलदार ने पोकलेन मशीन को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही।
चक्काजाम की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सुधीर बेनी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाइश दी और जाम समाप्त कराने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को चेतावनी दी कि सड़क जाम होने से आमजन को परेशानी होती है और आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
करीब तीन घंटे बाद प्रशासन और पुलिस की समझाइश के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ तथा यातायात बहाल हो सका।
राजस्व विभाग के अनुसार संबंधित भूमि शासकीय भूमि है, जहां वर्ष 2005 के बाद कुछ लोगों ने आकर निवास करना शुरू किया था। विभाग का कहना है कि इस भूमि को रेस्ट हाउस निर्माण के लिए आवंटित किया गया है और राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) की धारा 248 के तहत अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।
हालांकि मंगलवार को जिस तरीके से निजी पोकलेन मशीन के जरिए कार्रवाई का प्रयास हुआ, उसने प्रशासनिक व्यवस्था, भूमि प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।









































