—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी मुनिराज का 54वाँ अवतरण दिवस श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया*
दमोह। पथरिया श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर की धर्मशाला में शुक्रवार, 26 जून को परम पूज्य गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के प्रिय शिष्य, वाक् केशरी संत एवं श्रमणाचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी मुनिराज का 54वाँ अवतरण दिवस श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे कार्यक्रम का वातावरण धार्मिक आस्था एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं एवं वक्ताओं ने आचार्य श्री के जीवन, व्यक्तित्व और आध्यात्मिक साधना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे बचपन से ही धर्म, गुरु भक्ति एवं तप-साधना के प्रति पूर्णतः समर्पित रहे हैं। आहार, विहार तथा गुरु सेवा में उनकी निष्ठा और अनुशासन सभी के लिए प्रेरणादायक रहा है। बाल्यकाल से ही उनकी गंभीरता, मेधावी प्रतिभा तथा संयमित जीवनशैली ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई।
वक्ताओं ने बताया कि आचार्य श्री वर्ष 1990 में गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के सान्निध्य में आए। वर्ष 1995 में उन्होंने बाल ब्रह्मचारी व्रत धारण किया, वर्ष 1996 में ऐलक दीक्षा एवं वर्ष 1998 में मुनि दीक्षा ग्रहण कर मोक्षमार्ग की साधना का मार्ग अपनाया। उनकी कठोर तपस्या, अनुशासन एवं धर्मप्रचार की सेवाओं से प्रभावित होकर 24 मई 2017 को करगुवां जी अतिशय क्षेत्र में उनके पूज्य गुरु गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज ने उन्हें आचार्य पद से विभूषित किया, जिससे सम्पूर्ण जैन धर्मसंघ गौरवान्वित हुआ।
इस अवसर पर नगर में विराजमान पूज्य श्रमणोपाध्याय श्री 108 विशेष सागर जी मुनिराज ससंघ ने भी आचार्य श्री के उत्कृष्ट गुणों का स्मरण करते हुए श्रद्धालुओं से उनके आदर्श जीवन, संयम, त्याग और तपस्या से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को धर्ममय बनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने संगीतमय पूजन कर आचार्य श्री के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। भक्ति गीतों और मंगलाचरण से संपूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई।
श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर की धर्मशाला में आयोजित यह संपूर्ण कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें समाजजनों ने आचार्य श्री के दीर्घायु एवं धर्मप्रभावना के लिए मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।













































