—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर जिला जेल दमोह में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित*
दमोह। अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर जिला जेल दमोह में विधिक जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम NALSA DAWN (Drug Awareness and Wellness Navigation for a Drug Free India) Scheme-2025 के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दमोह के अध्यक्ष सुभाष सोलंकी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में उत्कर्ष दिवाकर, जिला विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चौरसिया, जेल अधीक्षक एम.एल. पटेल, जेल स्टाफ तथा बड़ी संख्या में बंदी उपस्थित रहे।
बंदियों को संबोधित करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्कर्ष दिवाकर ने कहा कि नशा व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति की निर्णय क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे वह अपराध एवं अन्य सामाजिक बुराइयों की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने बंदियों से नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सकारात्मक जीवन जीने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा जागरूकता ही नशे के विरुद्ध सबसे प्रभावी हथियार है। इस दौरान उन्होंने एनडीपीएस अधिनियम के विभिन्न दंडात्मक प्रावधानों की भी जानकारी दी और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े कानूनी परिणामों से अवगत कराया।
जिला विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चौरसिया ने नशे के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नशीले पदार्थों का सेवन न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उसके परिवार, सामाजिक संबंधों और आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। उन्होंने बंदियों को नशे से दूर रहने तथा पुनर्वास एवं सुधार की दिशा में सकारात्मक प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान बंदियों को नशे के दुष्प्रभाव, कानूनी प्रावधानों और नशामुक्त जीवन के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अंत में उपस्थित सभी बंदियों ने नशे से दूर रहने और समाज में सकारात्मक योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा बंदियों को स्वस्थ एवं जिम्मेदार जीवन की ओर प्रेरित करना रहा।











































