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*दमोह शिक्षा विभाग में अनधिकृत अनुपस्थिति का मामला दीपांशु अग्रवाल के खिलाफ आरोप-पत्र की तैयारी के निर्देश*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*दमोह शिक्षा विभाग में अनधिकृत अनुपस्थिति का मामला दीपांशु अग्रवाल के खिलाफ आरोप-पत्र की तैयारी के निर्देश*

*संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, सागर संभाग ने जिला शिक्षा अधिकारी से तीन दिन में मांगा प्रतिवेदन*

*नियम-14 के तहत आरोप-पत्र का प्रारूप तैयार करने के निर्देश*

दमोह। शिक्षा विभाग में सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी दीपांशु अग्रवाल, कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी तेंदूखेड़ा की कथित अनधिकृत अनुपस्थिति का मामला अब विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है।

संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, सागर संभाग द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी दमोह को जारी पत्र में पूरे प्रकरण का प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के साथ-साथ मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-14 के तहत आरोप-पत्र आदि का प्रारूप तैयार कर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

नवंबर 2025 से अनधिकृत अनुपस्थिति का उल्लेख

विभागीय पत्र में उल्लेख किया गया है कि दीपांशु अग्रवाल नवंबर 2025 से अपने कर्तव्य से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे। इस संबंध में उन्हें कारण बताओ सूचना आदि जारी किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

संयुक्त संचालक कार्यालय ने जिला शिक्षा अधिकारी से मामले से संबंधित संपूर्ण जानकारी का प्रतिवेदन मांगा है। साथ ही संबंधित लोक सेवक के विरुद्ध प्रस्तावित विभागीय कार्रवाई के लिए आरोप-पत्र का प्रारूप तैयार कर निर्धारित समय में उपलब्ध कराने को कहा गया है।

तीन दिन में देना होगा प्रतिवेदन

जारी निर्देशों के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को तीन दिवस के भीतर आरोप-पत्र का प्रारूप संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, सागर संभाग के कार्यालय में उपलब्ध कराना है, ताकि प्रकरण में नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जा सके।

पत्र में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुसार संबंधित कर्मचारी को कर्तव्य पर उपस्थित कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।

पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका पर उठ रहे सवाल

इस प्रकरण ने शिक्षा विभाग के पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि कर्मचारी की नवंबर 2025 से अनधिकृत अनुपस्थिति का मामला विभागीय स्तर पर लंबित था, तो उस समय इसकी प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी एस.के. नेमा के कार्यकाल में इस प्रकरण पर क्या कार्रवाई की गई थी और यदि संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध शिकायतें अथवा विभागीय जानकारी उपलब्ध थी, तो उसका समय रहते संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?

हालांकि, इन सवालों के संबंध में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी एस.के. नेमा का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। उनके कार्यकाल में मामले की वास्तविक स्थिति क्या थी और उनके स्तर से क्या कार्रवाई की गई, यह संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और आधिकारिक जवाब के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

अवैध वसूली के आरोपों की भी चर्चा

इस पूरे मामले के बीच सूत्रों के हवाले से संबंधित कर्मचारी द्वारा कथित रूप से लोगों से अवैध वसूली किए जाने के आरोपों की भी चर्चा सामने आ रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और उपलब्ध विभागीय पत्र में भी अवैध वसूली के आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में दर्ज नहीं किया गया है।

ऐसे में यह गंभीर सवाल जरूर उठता है कि यदि विभाग के पास इस प्रकार की कोई शिकायत या साक्ष्य पूर्व में उपलब्ध थे, तो उनकी जांच क्यों नहीं कराई गई? क्या तत्कालीन अधिकारियों को इस संबंध में कोई जानकारी थी? यदि थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

इन सवालों का जवाब विभागीय जांच अथवा आधिकारिक रिकॉर्ड से ही सामने आ सकता है।

नए जिला शिक्षा अधिकारी के सामने चुनौती

वर्तमान में जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में नए अधिकारी के पदस्थ होने के बाद यह मामला उनके सामने भी महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में आया है। संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, सागर संभाग के स्पष्ट निर्देश के बाद अब जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तथ्यात्मक प्रतिवेदन तैयार करना होगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विभागीय पत्र में अभी केवल आरोप-पत्र की तैयारी और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध आरोप सिद्ध हो चुके हैं। अंतिम निर्णय विभागीय जांच और सक्षम अधिकारी के आदेश के बाद ही माना जाएगा।

अब जवाबदेही तय होने की उम्मीद

इस प्रकरण में अब कई सवालों के जवाब विभाग से अपेक्षित हैं—नवंबर 2025 से अनुपस्थिति के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हुई? पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिसों पर क्या कार्रवाई हुई? संबंधित कर्मचारी को कर्तव्य पर उपस्थित कराने के लिए क्या कदम उठाए गए? और यदि अन्य गंभीर शिकायतें विभाग के संज्ञान में थीं, तो उनकी जांच क्यों नहीं कराई गई?

संयुक्त संचालक द्वारा तीन दिन में प्रतिवेदन और आरोप-पत्र का प्रारूप मांगे जाने के बाद अब इस मामले में विभागीय कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

फोन रिसीव ना होने से संबंधित कर्मचारी दीपांशु अग्रवाल तथा पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी एस.के. नेमा का पक्ष प्राप्त नहीं हुआ…?

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