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*चौपाल से मुंबई के स्टूडियो तक पहुंची सुनील लोधी की आवाज ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ ने बनाई खास पहचान*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*चौपाल से मुंबई के स्टूडियो तक पहुंची सुनील लोधी की आवाज ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ ने बनाई खास पहचान*

*जन्म से दृष्टिबाधित सुनील ने तंबूरे के साथ शुरू किया था भजन का सफर, आज देशभर में गूंज रही बुंदेलखंड की यह आवाज*


Mp सागर/ – -बुंदेलखंड की मिट्टी में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ उस प्रतिभा को सही मंच मिलने की होती है। सागर जिले के अगरा गांव के करीब 25 वर्षीय सुनील लोधी इसकी एक मिसाल हैं। जन्म से दृष्टिबाधित सुनील ने न किसी बड़े संगीत संस्थान से प्रशिक्षण लिया और न ही किसी फिल्मी परिवार से उनका नाता रहा। उन्होंने गांव की चौपालों, देहात की गलियों और यहां तक कि ट्रेनों में तंबूरा लेकर भजन और बुंदेली लोकगीत गाते हुए अपनी पहचान बनाई।

बचपन से ही सुनील का झुकाव संगीत और भक्ति गीतों की ओर था। करीब 10 वर्ष की उम्र में उन्होंने तंबूरा बजाना सीख लिया था। धीरे-धीरे गायन उनके जीवन का हिस्सा ही नहीं, बल्कि आजीविका का साधन भी बन गया।

स्कूल की पढ़ाई नहीं कर सके, गायकी को बनाया सहारा

आर्थिक परिस्थितियों और दृष्टिबाधिता के चलते सुनील नियमित रूप से स्कूल की पढ़ाई नहीं कर सके। इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। गांव-देहात में होने वाले धार्मिक आयोजनों और कार्यक्रमों में भजन गाते हुए उन्होंने अपनी गायकी को निखारा।

एक दौर ऐसा भी रहा जब सुनील ट्रेनों में भजन गाकर अपना गुजारा करते थे। उनके पास बड़े मंच नहीं थे, महंगे वाद्ययंत्र नहीं थे और कोई प्रचार-प्रसार का साधन भी नहीं था। उनके पास अगर कुछ था तो वह थी उनकी आवाज और तंबूरा।

‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’ ने बदल दी जिंदगी

सुनील लोधी की जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ उस समय आया, जब उनका भजन—

“ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान,
हमारे संकट काटो प्रभु…”

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

बुंदेली लोकधुन और हनुमान भक्ति से जुड़े इस भजन को सुनील ने बेहद सहज अंदाज में अपनी आवाज और तंबूरे के साथ प्रस्तुत किया। उनकी आवाज में मौजूद सादगी और बुंदेली मिट्टी की खुशबू ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

भजन का वीडियो सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल गया। इसके व्यूज को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह प्रस्तुति बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंची।

वायरल वीडियो पहुंची मुंबई, आया बुलावा

सोशल मीडिया पर सुनील की आवाज की चर्चा बढ़ी तो उनकी प्रतिभा संगीत प्रोड्यूसर पंकज VRK तक भी पहुंची। उनकी आवाज से प्रभावित होकर सुनील को खोजा गया और उन्हें मुंबई बुलाया गया।

गांव की चौपालों और ट्रेनों में तंबूरा लेकर भजन गाने वाला यह युवा पहली बार प्रोफेशनल रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचा। मुंबई में उन्होंने कई गीत रिकॉर्ड किए। उनके लिए यह सिर्फ एक रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष के बाद मिले बड़े अवसर की शुरुआत थी।

फिल्म ‘हनुमान अंश’ में मिली आवाज देने की बड़ी जिम्मेदारी

इसके बाद सुनील लोधी को फिल्म ‘हनुमान अंश’ के गीत “मैंने तेरे ही भरोसे” में अपनी आवाज देने का मौका मिला। यह फिल्म नीम करोली बाबा के जीवन से प्रेरित बताई गई है।

गीत की पंक्तियां—

“मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डाल दी…”

भक्ति भाव से जुड़ी हैं और सुनील की आवाज ने इसे एक अलग पहचान दी है।

सुनील की अब तक की यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगती—

अगरा गांव → चौपाल में भजन → तंबूरा → ट्रेनों में गायन → सोशल मीडिया पर वायरल आवाज → ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’ → मुंबई का स्टूडियो → ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ → फिल्म ‘हनुमान अंश’।

बुंदेलखंड की आवाज अब बड़े मंच तक

सुनील की कहानी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उनकी पहचान किसी बड़े शहर से नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के एक गांव से निकली। जिस आवाज को कभी गांव की चौपाल और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोग सुनते थे, वही आवाज अब सोशल मीडिया और फिल्मी गीत के माध्यम से बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच रही है।

‘मैंने तेरे ही भरोसे’ गीत को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की खूब प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। गीत के वायरल होने के दावे किए जा रहे हैं और कई लोग इसे लगातार सुनने की बात कह रहे हैं।

फिल्म की कमाई, हाउसफुल शो और केवल इसी गीत के कारण फिल्म के पलटने जैसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से होना बाकी है। हालांकि इतना जरूर है कि सुनील लोधी की आवाज ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी

सुनील लोधी की कहानी सिर्फ एक गायक की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि प्रतिभा को अगर अवसर मिल जाए तो परिस्थितियां उसकी राह नहीं रोक सकतीं।

दृष्टिबाधिता, आर्थिक कठिनाइयां, सीमित संसाधन और छोटे गांव से निकलकर मुंबई के रिकॉर्डिंग स्टूडियो तक पहुंचना आसान नहीं था। सुनील ने अपनी आवाज को ही अपनी ताकत बनाया और आज वही आवाज उनकी पहचान बनती जा रही है।

अगरा गांव के सुनील लोधी ने साबित किया है कि हुनर को मंच मिलने में भले ही वक्त लगे, लेकिन जब आवाज दिल से निकलती है तो वह चौपाल से निकलकर देशभर तक पहुंच सकती है।

एमपी अपडेट न्यूज़ टीम और सभी पाठक आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं

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