—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*सिंगौरगढ़ किला मार्ग पर लगा गेट हटाने के निर्देश एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर की जांच*
*भूस्वामी को एक दिन की मोहलत, गेट नहीं हटाने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी पुराने राजस्व रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे*

दमोह/सिंग्रामपुर। ऐतिहासिक सिंगौरगढ़ किले तक पहुंचने वाले वर्षों पुराने आवागमन मार्ग को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासन के संज्ञान में पहुंच गया है। मार्ग पर भूस्वामी द्वारा गेट लगाए जाने की सूचना के बाद बुधवार दोपहर तेंदूखेड़ा एसडीएम सीजी गोस्वामी प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे और मार्ग की स्थिति का निरीक्षण किया। जांच के दौरान एसडीएम ने संबंधित भूस्वामी को रास्ते में लगाए गए गेट को एक दिन के भीतर हटाने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय में गेट नहीं हटाए जाने पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
मौके पर तेंदूखेड़ा एसडीएम सीजी गोस्वामी के साथ नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक (आरआई), पटवारी तथा सिंग्रामपुर चौकी प्रभारी विकास सिंह चौहान सहित राजस्व एवं पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर रास्ते की स्थिति का निरीक्षण किया और संबंधित भूमि तथा आवागमन मार्ग से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली।
वर्षों पुराने रास्ते को लेकर विवाद
स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि सिंगौरगढ़ किले तक पहुंचने के लिए उक्त मार्ग का उपयोग लंबे समय से आम आवागमन के लिए किया जाता रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यह रास्ता करीब 100 वर्षों से उपयोग में है। ऐसे में मार्ग पर गेट लगाए जाने से ग्रामीणों के साथ-साथ किले तक पहुंचने वाले पर्यटकों और अन्य लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसी मामले को लेकर समस्त आदिवासी समाज की ओर से मध्यप्रदेश शासन के राज्य मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के निज कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया था। ज्ञापन में वर्षों पुराने मार्ग को स्थायी रूप से बहाल कराने, आवागमन के नाम पर कथित रूप से ली जा रही रसीद एवं शुल्क व्यवस्था को बंद कराने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी गई थी।
राज्य मंत्री ने लिया संज्ञान
ज्ञापन मिलने के बाद राज्य मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संज्ञान लिया। बताया गया कि मंत्री ने जिला कलेक्टर से दूरभाष पर चर्चा कर सिंगौरगढ़ किला मार्ग की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक कार्रवाई के संबंध में बातचीत की। मंत्री ने आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों को समस्या के शीघ्र निराकरण का आश्वासन भी दिया था।
इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर बुधवार को मौके पर पहुंचकर जांच की गई।
राजस्व रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी रास्ते की स्थिति
मौके पर निरीक्षण के दौरान एसडीएम सीजी गोस्वामी ने कहा कि यदि मार्ग लंबे समय से आम आवागमन के लिए उपयोग होता रहा है, तो उसकी वास्तविक स्थिति का परीक्षण राजस्व रिकॉर्ड एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया जाएगा।
ग्रामीणों द्वारा करीब 100 वर्षों से रास्ते के उपयोग की बात कही जा रही है। ऐसे में प्रशासन पुराने राजस्व अभिलेखों, भूमि की स्थिति तथा रास्ते से संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगा। रिकॉर्ड की जांच के बाद मार्ग की स्थिति और उससे संबंधित अधिकारों को लेकर स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
एक दिन में गेट हटाने के निर्देश
प्रशासन की मौके पर हुई कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण निर्देश भूस्वामी को गेट हटाने का दिया गया। एसडीएम ने संबंधित भूस्वामी को एक दिन के भीतर रास्ते में लगाए गए गेट को अलग करने के निर्देश दिए हैं।
एसडीएम ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर गेट नहीं हटाया गया तो प्रशासन द्वारा नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद फिलहाल मार्ग पर आवागमन को लेकर पैदा हुई समस्या के तत्काल समाधान की उम्मीद जगी है।
सिर्फ गेट हटाना नहीं, स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि तत्काल गेट हटाना समस्या का अस्थायी समाधान होगा। उनकी मांग है कि सिंगौरगढ़ किले तक पहुंचने वाले पुराने मार्ग की स्थिति को राजस्व रिकॉर्ड और वास्तविक उपयोग के आधार पर स्थायी रूप से स्पष्ट किया जाए।
मार्ग के स्वामित्व, राजस्व अभिलेखों और लंबे समय से चले आ रहे सार्वजनिक उपयोग की निष्पक्ष जांच के बाद प्रशासन को ऐसी स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे भविष्य में दोबारा इस प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
ऐतिहासिक सिंगौरगढ़ किला क्षेत्र की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। किले तक पहुंचने वाले मार्ग को लेकर विवाद के कारण स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ यहां आने वाले पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब प्रशासन द्वारा मौके पर जांच कर गेट हटाने के निर्देश दिए जाने के बाद लोगों की नजर आगामी कार्रवाई और राजस्व रिकॉर्ड की जांच पर है। यदि प्रशासन जांच के बाद स्थायी आवागमन व्यवस्था सुनिश्चित करता है, तो लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद का समाधान संभव हो सकेगा।
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