—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह— 
*झलौन उप स्वास्थ्य केंद्र पर ताला भवन निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल*
झलोन से मुकेश जैन की रिपोर्ट
झलौन/तेंदूखेड़ा। जनपद पंचायत तेंदूखेड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत झलौन में लगभग एक वर्ष पूर्व निर्मित उप स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए इस स्वास्थ्य केंद्र पर आज भी ताला लटका हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि भवन तैयार होने के बाद भी यहां स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं और न ही किसी चिकित्सक अथवा स्वास्थ्यकर्मी की नियमित पदस्थापना की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र के बंद रहने से उन्हें सामान्य बीमारियों के उपचार के लिए भी अन्य गांवों अथवा कस्बों का रुख करना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक संसाधनों दोनों की अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है।
इधर, लगभग 49 लाख रुपये की लागत से निर्मित भवन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य पूर्ण होने के कुछ समय बाद ही भवन की दीवारों से पुट्टी झड़ने लगी है। अभी मानसून की बारिश भी शुरू नहीं हुई है, इसके बावजूद भवन में गुणवत्ता संबंधी खामियां दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते जांच और सुधार नहीं कराया गया तो बारिश के दौरान भवन को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है।
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में उपयोग की गई सामग्री एवं गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी धन से निर्मित सार्वजनिक भवनों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि आमजन को लंबे समय तक उसका लाभ मिल सके।
स्वास्थ्य केंद्र परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि पूर्व में समीप स्थित शराब दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र परिसर के चारों ओर बाउंड्रीवाल निर्माण की मांग करते हुए कहा कि इससे परिसर सुरक्षित रहेगा और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारु संचालन के लिए बेहतर वातावरण तैयार हो सकेगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि उप स्वास्थ्य केंद्र में शीघ्र चिकित्सक एवं आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति कर स्वास्थ्य सेवाएं प्रारंभ की जाएं तथा भवन निर्माण की गुणवत्ता की जांच कर दोष पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।











































