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*सिग्रामपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर जुटे केंद्रीय व प्रदेश के मंत्री किया माल्यार्पण एवं पौधारोपण*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*सिग्रामपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर जुटे केंद्रीय व प्रदेश के मंत्री किया माल्यार्पण एवं पौधारोपण*

दमोह। वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के अवसर पर बुधवार को जबेरा विधानसभा क्षेत्र के सिग्रामपुर स्थित खेल मैदान में जिला प्रशासन द्वारा भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्र एवं प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सहभागिता करते हुए वीरांगना रानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में केंद्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार दुर्गादास उईके, मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह, प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी तथा मंत्री लखन पटेल ने सिग्रामपुर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके पश्चात अतिथियों ने परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर सांसद राहुल सिंह, विधायक जयंत मलैया, डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, पूर्व सांसद चंद्रभान सिंह, विधायक उमादेवी खटीक, विधायक शरद कोल, जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मंजू कटारे सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। आयोजन स्थल पर वीरांगना रानी दुर्गावती के अदम्य साहस, शौर्य और मातृभूमि के प्रति समर्पण को याद करते हुए उनके जीवन एवं बलिदान पर प्रकाश डाला गया।

प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की कमान कलेक्टर प्रताप नारायण यादव, पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी, जिला पंचायत सीईओ प्रवीण फुलपगारे, एसडीएम गोस्वामी, तहसीलदार डॉ. विवेक व्यास, आशुतोष गुप्ता तथा आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों ने संभाली।

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने वीरांगना रानी दुर्गावती के त्याग, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। आयोजन स्थल पर जनजातीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय जनसमुदाय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

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