—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*जैन सम्राट गौरव वर्ष-2026 भारतीय जैन मिलन क्षेत्र-10 की 32 शाखाओं की ऐतिहासिक ज़ूम संगोष्ठी 1200 से अधिक लोगों ने लिया भाग*

दमोह। भारतीय जैन मिलन द्वारा जैन सम्राट गौरव वर्ष-2026 के अंतर्गत भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक-10 की 32 शाखाओं का एक ऐतिहासिक ऑनलाइन ज़ूम सम्मेलन आयोजित किया गया। इस भव्य संगोष्ठी में क्षेत्र की विभिन्न शाखाओं से 1200 से अधिक वीर-वीरांगनाओं ने सहभागिता करते हुए जैन सम्राटों के गौरवशाली इतिहास, भारतीय संस्कृति में उनके योगदान और राष्ट्र निर्माण में जैन समाज की भूमिका पर विस्तार से विचार सुने।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महावीर की मंगल प्रार्थना के साथ हुआ। इसके पश्चात भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतिवीर कमलेन्द्र जैन ने प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य, मेरठ महानगर निगम के पूर्व अध्यक्ष, प्रख्यात लेखक एवं सुप्रसिद्ध उपन्यासकार अतिवीर सुरेश जैन ‘ऋतुराज’ का मार्गदर्शन संगठन के प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि जैन सम्राट गौरव वर्ष का उद्देश्य समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी को जैन इतिहास, संस्कृति और महापुरुषों के अद्वितीय योगदान से परिचित कराना है, ताकि उनमें अपने स्वर्णिम अतीत के प्रति गर्व की भावना विकसित हो।
मुख्य वक्ता के रूप में अपने ओजस्वी एवं प्रेरक उद्बोधन में अतिवीर सुरेश जैन ‘ऋतुराज’ ने जैन सम्राटों के शौर्य, न्यायप्रियता, धर्मनिष्ठा और लोककल्याणकारी शासन की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि जैन राजाओं ने केवल विशाल साम्राज्य ही स्थापित नहीं किए, बल्कि अहिंसा, न्याय, धर्म, शिक्षा और जनकल्याण पर आधारित आदर्श शासन व्यवस्था प्रस्तुत कर भारत की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनके शासनकाल में मंदिरों, तीर्थों, गुरुकुलों, कला, साहित्य और व्यापार का अभूतपूर्व विकास हुआ।
उन्होंने ईसा पूर्व सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के त्यागमय जीवन, सम्राट सम्प्रति द्वारा जैन धर्म के व्यापक प्रचार-प्रसार, राजा कुमारपाल के धर्मपरायण एवं जनहितकारी शासन तथा वीरांगना रानी अब्बक्का चौटा के अदम्य साहस का प्रेरक उल्लेख किया। साथ ही महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई, डॉ. सी. वी. रमन सहित अनेक जैन विभूतियों के विज्ञान, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि जैन इतिहास केवल धार्मिक इतिहास नहीं, बल्कि राष्ट्र गौरव, स्वाभिमान, ज्ञान-विज्ञान, प्रशासन, व्यापार, पराक्रम और मानवीय मूल्यों की समृद्ध विरासत का इतिहास है। उन्होंने प्रत्येक जैन परिवार से अपने बच्चों को इस गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने का आह्वान किया, जिससे उनमें समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व एवं गर्व की भावना विकसित हो सके।
कार्यक्रम में भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक-10 की 32 शाखाओं से 1200 से अधिक वीर-वीरांगनाओं ने ऑनलाइन सहभागिता कर जैन सम्राटों के प्रेरणादायी इतिहास का श्रवण किया।
कार्यक्रम के समापन पर क्षेत्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतिवीर दिलेश जैन चौधरी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय पदाधिकारियों, वक्ताओं एवं सभी सहभागी वीर-वीरांगनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र क्रमांक-10 भविष्य में भी जैन गौरव, संस्कृति और इतिहास के प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे प्रेरक एवं जागरूकता आधारित कार्यक्रम निरंतर आयोजित करता रहेगा।












































