—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*बटियागढ़ तहसीलदार की गाड़ी पर लगी थी लाल बत्ती सवाल पूछते ही बोले—“हमें तो मालूम ही नहीं”*
दमोह/बटियागढ़ सरकारी अधिकारियों के वाहनों पर लाल बत्ती के इस्तेमाल को लेकर बटियागढ़ में एक मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक नियमों के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बटियागढ़ तहसीलदार के सरकारी वाहन पर लाल बत्ती लगी दिखाई दी।
मामले में जब तहसीलदार से वाहन पर लाल बत्ती लगाए जाने और इसके लिए अनुमति होने के संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा—“हमें तो मालूम ही नहीं है कि लाल बत्ती लगा सकते हैं या नहीं।”
सवाल किए जाने के तुरंत बाद तहसीलदार ने स्वयं वाहन से लाल बत्ती निकालकर उसे गाड़ी के अंदर रख लिया। घटनाक्रम के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
अनुमति थी या नियमों की अनदेखी?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सरकारी वाहन पर लाल बत्ती लगाने की अनुमति को लेकर अधिकारी स्वयं स्पष्ट नहीं थे, तो वाहन पर लाल बत्ती लगाई कैसे गई? क्या इसके लिए किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति या कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया था?
यदि लाल बत्ती लगाने की अनुमति नहीं थी, तो फिर सरकारी वाहन पर इसे लगाने की जिम्मेदारी किसकी थी और यह किसके निर्देश पर लगाई गई थी—यह भी जांच का विषय है।
वरिष्ठ अधिकारियों से जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद अब लोगों की नजर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई पर है। जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि तहसीलदार के सरकारी वाहन पर लाल बत्ती किस नियम, आदेश अथवा अनुमति के आधार पर लगाई गई थी।
फिलहाल सवाल बरकरार है—सरकारी वाहन पर लाल बत्ती लगी कैसे और किसकी अनुमति से?
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