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*हेलमेट और सीट बेल्ट चालान से बचने के लिए नहीं जीवन रक्षा के लिए हैं*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*हेलमेट और सीट बेल्ट चालान से बचने के लिए नहीं जीवन रक्षा के लिए हैं*

*शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दमोह में यातायात पुलिस ने आयोजित की वृहद जागरूकता कार्यशाला करीब 1200 छात्र-छात्राओं को दी सड़क सुरक्षा की जानकारी*


दमोह। सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और लोगों में सुरक्षित यातायात की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से पुलिस परिवहन एवं शोध संस्थान, पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुसार पूरे मध्यप्रदेश में 10 दिवसीय विशेष प्रवर्तन एवं जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य केवल यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर चालानी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि आमजन के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना और सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक दमोह श्री आनंद कलादगि (IPS) के मार्गदर्शन में शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, दमोह में यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में यातायात थाना प्रभारी दमोह श्री दलबीर सिंह मार्को एवं यातायात पुलिस स्टाफ ने विद्यालय के लगभग 1200 छात्र-छात्राओं को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी।

हेलमेट और सीट बेल्ट के महत्व को समझाया

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को दोपहिया वाहन चलाते समय मानक हेलमेट पहनने तथा चार पहिया वाहन में यात्रा करते समय सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने के संबंध में तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई।

यातायात पुलिस ने विद्यार्थियों को समझाया कि सड़क दुर्घटना के दौरान हेलमेट और सीट बेल्ट गंभीर चोटों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों से कहा गया कि वे यातायात नियमों को केवल पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए अपनाएं।

कार्यक्रम में विशेष रूप से संदेश दिया गया कि हेलमेट और सीट बेल्ट चालान से बचने का साधन नहीं, बल्कि अनमोल जीवन की रक्षा के महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

पीएम राहत योजना की दी जानकारी

कार्यशाला में विद्यार्थियों को सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले व्यक्तियों के उपचार से संबंधित पीएम राहत योजना के बारे में भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अधिकतम ₹1.5 लाख तक कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

पुलिस द्वारा विद्यार्थियों से कहा गया कि दुर्घटना की स्थिति में घायलों की मदद करने के साथ-साथ उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी जागरूकता फैलाएं।

‘राह-वीर योजना’ के तहत घायलों की मदद के लिए आगे आने का आह्वान

कार्यक्रम में ‘राह-वीर योजना’ के संबंध में भी विद्यार्थियों को विस्तार से बताया गया। पुलिस अधिकारियों ने समझाया कि सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। गोल्डन ऑवर के दौरान घायल को नजदीकी अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने से उसकी जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है।

सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने और उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए शासन द्वारा संचालित राह-वीर योजना की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों से अपील की गई कि दुर्घटना की स्थिति में भय या अनावश्यक झिझक के कारण पीछे न हटें, बल्कि सुरक्षित तरीके से पीड़ित की मदद के लिए आगे आएं।

विद्यार्थियों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक रहने का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सड़क पार करते समय सावधानी, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने, नशे की स्थिति में वाहन नहीं चलाने तथा यातायात संकेतों का पालन करने सहित विभिन्न सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के करीब 1200 छात्र-छात्राओं एवं विद्यालयीन स्टाफ को स्वयं यातायात नियमों का पालन करने और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के अन्य लोगों को भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का संकल्प दिलाया गया।

यातायात पुलिस द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। यातायात नियमों का पालन करके दुर्घटनाओं को रोकने और अनमोल जीवन बचाने में प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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