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₹कार चढ़ाकर हत्या करने वाले पिता-पुत्र को आजीवन कारावास*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

₹कार चढ़ाकर हत्या करने वाले पिता-पुत्र को आजीवन कारावास*

*पंचम अपर सत्र न्यायालय का फैसला, दोनों आरोपियों पर 1-1 हजार रुपये का अर्थदंड भी*

दमोह। कार चढ़ाकर एक व्यक्ति की हत्या करने के मामले में दमोह न्यायालय ने पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय श्रीमान पंकज कुमार वर्मा, पंचम अपर सत्र न्यायाधीश, दमोह ने मामले में प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।

अभियोजन के अनुसार घटना 11 जुलाई 2025 की शाम करीब 6:30 बजे अजमेरी गार्डन तिगड्डा, दमोह के पास हुई थी। आरोप के मुताबिक सह-अभियुक्त नसीर खान द्वारा मुख्य अभियुक्त अब्दुल अकील खान को इशारा किए जाने के तत्काल बाद अब्दुल अकील ने अपनी सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार क्रमांक MP-20-CF-4322 को अत्यधिक तेज गति से चलाते हुए मृतक रक्के उर्फ राकेश रैकवार के ऊपर चढ़ा दिया।

अभियोजन के मुताबिक कार की चपेट में आने के बाद राकेश रैकवार को कार से करीब 80 फुट तक घसीटा गया, जिससे उसे गंभीर आंतरिक एवं बाहरी चोटें आईं। घायल अवस्था में उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई।

घटना के बाद फरियादिया खिलौनाबाई की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली दमोह में अपराध क्रमांक 520/2025 दर्ज किया गया। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) एवं 3(5) के तहत मामला पंजीबद्ध कर पुलिस द्वारा विवेचना की गई। विवेचना पूर्ण होने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष अभियोजन की ओर से मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी न्यायालय के समक्ष रखा गया। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्कों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया।

न्यायालय ने अब्दुल अकील खान पिता नसीर खान, उम्र 35 वर्ष, तथा नसीर खान पिता अब्दुल रज्जाक, उम्र 59 वर्ष, दोनों निवासी अजमेरी हाल के पास, बजरिया वार्ड नंबर-4, दमोह, को भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103(1) सहपठित धारा 3(5) के तहत आजीवन कारावास तथा 1,000-1,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

इस फैसले के बाद मामले में अभियोजन की ओर से की गई पैरवी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रकरण में पैरवी सहायक निदेशक अभियोजन धर्मेन्द्र सिंह तारन के मार्गदर्शन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी सतीश कपस्या एवं एडीपीओ एन. पी. पटेल, दमोह द्वारा की गई। वहीं सहायक विनय नामदेव ने आवश्यक सहयोग प्रदान किया।

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