—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*डॉ. बुधवानी पर मामला दर्ज करने की मांग अग्रवाल समाज ने कलेक्ट्रेट में किया प्रदर्शन*
*हर्निया ऑपरेशन के बाद सचिन अग्रवाल की मौत का मामला परिजनों ने उपचार और एनेस्थीसिया प्रक्रिया की जांच की मांग*
दमोह। शहर के स्टेशन चौराहा स्थित विद्या हॉस्पिटल में हर्निया के ऑपरेशन के दौरान 40 वर्षीय सचिन अग्रवाल, निवासी हिंडोरिया, की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद मृतक के परिजनों के साथ अग्रवाल समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और मामले की निष्पक्ष जांच तथा संबंधित चिकित्सक डॉ. पीतांबर बुधवानी के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की मांग की।
ऑपरेशन के लिए सामान्य हालत में अस्पताल पहुंचे थे सचिन
जानकारी के अनुसार सचिन अग्रवाल 21 सितंबर को हर्निया की समस्या के उपचार के लिए विद्या हॉस्पिटल पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के समय उनकी हालत सामान्य थी और वे स्वयं बाइक चलाकर अस्पताल पहुंचे थे। शाम करीब 6 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद आवश्यक जांच कराई गई और रात करीब 10 बजे उन्हें ऑपरेशन के लिए ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया।
परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के बाद सचिन को होश नहीं आया। रात करीब 12 से 1 बजे के बीच परिवार को उनकी मौत की जानकारी दी गई। इसके बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने अस्पताल में उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध किया। मृतक के चाचा राजेश अग्रवाल और चचेरे भाई अमित अग्रवाल ने भी चिकित्सक और अस्पताल स्टाफ पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की।
एनेस्थीसिया प्रक्रिया की जांच की मांग
कलेक्ट्रेट में दिए गए ज्ञापन में परिजनों ने विशेष रूप से ऑपरेशन के दौरान अपनाई गई एनेस्थीसिया प्रक्रिया, चिकित्सकीय योग्यता एवं अनुमति, ऑपरेशन से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड, दवाओं तथा अन्य दस्तावेजों की जांच कराने की मांग रखी। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद सचिन की स्थिति बिगड़ने के बावजूद उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकेगी।
अग्रवाल समाज भी परिवार के साथ आया
मामले में मृतक के परिजनों के समर्थन में अग्रवाल समाज के लोग भी कलेक्ट्रेट पहुंचे। बड़ी संख्या में समाजजनों ने प्रदर्शन करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और दोष पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।
दबाव के बाद कलेक्टर पहुंचे ज्ञापन लेने
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद रहे। बताया गया कि परिजनों और समाजजनों के दबाव के बाद कलेक्टर प्रताप नारायण यादव स्वयं ज्ञापन लेने पहुंचे। कलेक्टर ने मामले में जांच के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट को जांच में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण
घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित कराया था। पुलिस का कहना है कि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच के बाद स्पष्ट होगी। इसलिए फिलहाल उपचार में लापरवाही को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता। मामले में चिकित्सकीय रिकॉर्ड, ऑपरेशन के दौरान की प्रक्रिया, एनेस्थीसिया से जुड़े दस्तावेज और पोस्टमार्टम/विसरा रिपोर्ट जांच के प्रमुख आधार रहेंगे।
परिवार के सामने आर्थिक संकट का भी सवाल
परिजनों के मुताबिक सचिन अग्रवाल किराना व्यवसाय से जुड़े थे और अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और छोटे बच्चे हैं। अचानक हुई मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक संकट की स्थिति उत्पन्न होने की बात परिजनों ने कही है।
फिलहाल पूरे मामले में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। पोस्टमार्टम, विसरा और चिकित्सकीय जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सचिन अग्रवाल की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या उपचार प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी।

















